
रतलाम । सात पत्थरों से सजी एक छोटी-सी श्रृंखला, हाथ में गेंद और उसे फिर से जोड़ने की चुनौती सितोलिया यानी सात पत्थरों का यह पारंपरिक देसी खेल कभी मालवा के गली-मोहल्लों की रौनक हुआ करता था। खेल सरल है, लेकिन इसमें छिपा रोमांच, टीम भावना और उत्साह इसे आज भी उतना ही आनंददायक बनाता है।
इसी आनंद और उत्साह को उत्सव का रूप देने के उद्देश्य से सृजन महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने धामनोद स्थित साई टीला पर पिकनिक का आयोजन किया। विशेष रूप से नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए यह अवसर केवल पिकनिक नहीं, बल्कि एक-दूसरे को जानने, नए मित्र बनाने और महाविद्यालयीन जीवन की शुरुआती स्मृतियों को संजोने का अवसर बन गया।
सितोलिया के खेल में एक टीम गेंद से सात पत्थरों की बनाई श्रृंखला को गिराती है और फिर गेंद से बचते हुए पूरी टीम मिलकर उन्हें दोबारा जमाने का प्रयास करती है। वहीं दूसरी टीम गेंद से खिलाड़ियों को रोकने और उन्हें आउट करने की कोशिश करती है। देखते ही देखते मैदान में दौड़ते कदम, गेंद की आवाज, साथियों की पुकार और जीत के लिए बढ़ता उत्साह वातावरण को रोमांच से भर देते हैं।
इस आयोजन की सबसे आत्मीय बात यह रही कि विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों ने भी इस पारंपरिक खेल में भाग लिया। खेलते हुए शिक्षकों के चेहरे पर जैसे वर्षों पुराना बचपन लौट आया। उनके लिए यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि उन दिनों की स्मृतियों में पुनः प्रवेश करने जैसा अनुभव था, जब गली-मोहल्लों में ऐसे ही खेल बच्चों के उत्साह और सामूहिक आनंद का केंद्र हुआ करते थे।
दस टीमों के बीच आयोजित इस रोमांचक टूर्नामेंट में टीम हर्षिता ने विजेता का खिताब अपने नाम किया, जबकि टीम प्रियंका उपविजेता रही। हालांकि मैदान में जीत और हार का निर्णय हुआ, लेकिन आयोजन की वास्तविक जीत उस सामूहिक उल्लास में दिखाई दी, जिसमें सभी विद्यार्थियों ने पूरे जोश और उमंग के साथ भाग लिया।
सितोलिया के बहाने विद्यार्थियों ने केवल एक पारंपरिक खेल नहीं खेला, बल्कि मालवा की उस सांस्कृतिक स्मृति को भी महसूस किया, जो कभी हमारे आसपास के जीवन का सहज हिस्सा हुआ करती थी। गेंद, सात पत्थरों और दौड़ते कदमों के बीच नवागंतुक विद्यार्थियों ने महाविद्यालय जीवन की अपनी शुरुआती यादों को संजोया, नए दोस्त बनाए और आपसी मेल-मिलाप को एक नई आत्मीयता दी।