प्रयोगशीलता साहित्य को समृद्ध करती है- प्रो. चौहान

जलेसं की गोष्ठी में 97 वर्षीय शायर ने दी अपनी प्रस्तुति

रतलाम। साहित्य की किसी भी विधा में प्रयोग उसे समृद्ध करते हैं । यही प्रयोगशीलता किसी भी विधा की लोकप्रियता का आधार बनती है। शायरी में इन दिनों जो प्रयोग किया जा रहे हैं , वे हमें आशान्वित करते हैं कि नई पीढ़ी इस विधा से और अधिक प्रभावित और प्रेरित होगी। साहित्य की हर विधा का लक्ष्य इंसानियत की स्थापना ही है। हम अपनी रचनाओं के ज़रिए इंसानियत और मनुष्यता का संदेश फैलाएंगे तो समाज के समक्ष सकारात्मक वातावरण बनेगा।
उक्त विचार जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा आयोजित तीसरी तरही नशिस्त में वरिष्ठ कवि एवं ग़ालिब के शेरों का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने वाले अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि साहित्य लोगों के बीच प्रेम का प्रसार करता है। यहां नफ़रत की कोई जगह नहीं होती। यहां मनुष्य के जीवन को सार्थक स्वरूप प्रदान करने की चिंता होती है। ऐसा साहित्य जनमानस को प्रभावित करता है।
गोष्ठी अध्यक्षता करते हुए 97 वर्षीय शायर मिर्ज़ा मक़सूद बेग ने रतलाम की गंगा-जमुनी तहज़ीब और साहित्य परंपरा को अनुपम बताया। उन्होंने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा-

कैसे गुज़ारें ज़िन्दगी पढ़कर तो देखिए,
सबकुछ लिखा हुआ है ये गीता के सार में।

जनवादी लेखक संघ युसूफ़ जावेदी ने कहा कि साहित्य हमें सलीका सिखाता है । हमारे अनुभवी और बुजुर्ग साहित्यकार हमें लिखने से पहले सुनने के लिए प्रेरित करते हैं । विद्वानों को सुनना भी साहित्य के क़रीब जाना है।

इन्होंने पढ़ी रचनाएं
गोष्ठी में तरही मिसरे ‘ फूलों से ज़ख़्म खाए हैं हमने बहार में ‘ पर प्रभावी ग़ज़लें पढ़ी गईं। वरिष्ठ शायर मिर्ज़ा मक़सूद बेग, प्रो.रतन चौहान, यूसुफ़ जावेदी, सिद्दीक़ रतलामी, ओमप्रकाश मिश्र, अब्दुल सलाम खोखर, डॉ.एन.के. शाह, डॉ. गीता दुबे, प्रतिभा पांडे, हरिशंकर भटनागर, पूजा चोपड़ा, विनोद झालानी, श्याम सुंदर भाटी, डॉ. फ़रीद शेख, अमीरूद्दीन अमीर, शादाब रतलामी, मांगीलाल नगावत, डॉ .वसीम वाहिद, डॉ. तौफीक़, मुकेश सोनी, लक्ष्मण पाठक, बृजेश कुमार गौड़, यू.एल. जायसवाल , दिलीप जोशी, जी.एस.खींची, एस.के.मिश्रा, आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन ने दिए गए मिसरे पर अपनी बात कही। संचालन सिद्दीक़ रतलामी ने किया आभार आशीष दशोत्तर ने व्यक्त किया किया। अंत में जलेसं सचिव रणजीत सिंह राठौर की माताजी के निधन पर दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

अगली नशिस्त 18 अक्टूबर को
जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग द्वारा आयोजित तरही नशिस्त की चौथी कड़ी 18 अक्टूबर को होगी,जिसमें तरही मिसरे ‘ आंसू हमारी आंख का गौहरनुमा बने ‘ पर ग़ज़लें पढ़ी जाएंगी। जलेसं ने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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