- दिल्ली ऋषभ विहार आज की रविवारीय मंगल देशना
- “रावण सीता का हरण तो कर सका, पर अपना न बना सका, ऐसे ही गिरनार तीर्थ जैनों का था, है और रहेगा”

इंदौर 13 सितंबर(राजेश जैन दद्दू)। दिगंबर जैन पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सबके दिन एक-से नहीं होते। दिन बदलते देर नहीं लगती। जिंदगी में किसके साथ क्या हो जाय, पता नहीं। गुरुदेव ने कहा कि श्रीराम को राज्य मिलने वाला था, उसी दिन वनवास हो गया। श्रीकृष्ण का जन्म जेल में हुआ। सती सीता को गर्भवती अवस्था में वन में छोड़ दिया गया। देखते-ही-देखते समय बदल जाता है। इसलिए कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए।
गिरनार पर विशेष देशना
गुरुदेव ने कहा कि रावण ने सीता का हरण कर लिया था, परन्तु फिर भी सीता श्रीराम की ही कहलाती थी। आप हरण तो कर सकते हो, वस्तु छीन सकते हो, पर अपनी बना नहीं सकते हो। ऐसे ही हमारा गिरनार तीर्थ कुछ लोग छीनना चाहते हैं, वे छीन सकते हैं, पर गिरनार जैनों का था, है और रहेगा।
अपमान नहीं, अपनत्व दो
गुरुदेव ने कहा – जिंदगी संभल-संभल कर जियो। भूलकर भी किसी का तिरस्कार मत करो। कब किस पर कौन-सी विपत्ति आ जाय, कुछ पता नहीं। जियो और जीने दो। बुरे का फल बुरा ही होता है। क्षण भर की कषाय, भव-भव में पीड़ित करती है। कर्म किसी को नहीं छोड़ता, इसलिए कषाय करके कर्मों का आमंत्रण मत करो। जैसा बीज भूमि में बोओगे वैसी फसल होगी। अपने किए गए कुटिल भावों का फल जीव को स्वयं ही भोगना पड़ता है।
भजन करो, भगवान बनो
गुरुदेव ने कहा कि जो दान देता है, उसकी जगत में प्रशंसा होती है, यश प्राप्त होता है और संपत्ति वर्धमान होती है। जो जिनेन्द्र प्रभु की पूजा करता है, उसको सुंदर रूप की प्राप्ति होती है। जो साधुओं की सेवा करता है, उसकी समाज में शीघ्र ही ख्याति फैल जाती है। श्रेष्ठ कार्य करो, क्योंकि श्रेष्ठता पाना है तो शुभ कार्य करना ही होगा।
प्रण, प्राण, यश की रक्षा करो
अंत में गुरुदेव ने कहा कि प्रभु का नाम स्मरण करो, निश्चित कर्म का क्षय होगा। मन स्थिर करना है तो मंत्र जाप करो। सही सोचो, सही बोलो, सही रास्ते पर चलो। प्रयत्न पूर्वक प्रण, प्राण एवं यश की रक्षा करो। यही धर्म है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।