गणेश चतुर्थी पर मेडिकल कॉलेज को समर्पित हुई शरद चंद्र कानडे की देह

दधीचि की परंपरा में देहदान कर मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए दिया अमूल्य योगदान

रतलाम। देवताओं की रक्षा के लिए महर्षि दधीचि ने अपनी देह समर्पित की थी। उसी त्याग और सेवा की भावना को आगे बढ़ाते हुए गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर 88 वर्षीय शरद चंद्र लक्ष्मण राव कानडे ने अपनी अंतिम इच्छा के अनुरूप अपनी देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए समर्पित की। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला कानडे एवं परिवारजनों की सहमति से यह पुनीत देहदान किया गया। जीवन परिचय
श्री कानडे का जन्म 7 दिसंबर 1937 को उज्जैन में हुआ तथा शिक्षा नीमच में हुई। प्रारंभ से ही उनमें राष्ट्रप्रेम और समाजसेवा की भावना रही। भारत-चीन एवं भारत-पाक युद्ध के समय उन्होंने घर-घर जाकर सेना के लिए सहयोग राशि एकत्रित कर सीमा तक पहुंचाई। वे जीवन के बाद भी समाज के काम आने की इच्छा रखते थे। करीब 15 वर्ष पूर्व, जब रतलाम में मेडिकल कॉलेज नहीं था, उन्होंने इंदौर में देहदान का संकल्प-पत्र भरा था। रतलाम में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ होने के बाद वे स्वयं वहां से देहदान का फॉर्म लेकर आए और परिवार को भी इसके लिए तैयार किया। बाद में समाजसेवी गोविंद काकानी के माध्यम से उन्होंने रतलाम मेडिकल कॉलेज में अपना देहदान पंजीकृत कराया।
श्री कानडे ने वर्ष 1960 में रतलाम जिला शिक्षा विभाग से अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं। वर्ष 1961 में उनका विवाह श्रीमती निर्मला कानडे से हुआ। ईमानदारी, कर्मठता और समयबद्धता के लिए वे विभाग में विशेष रूप से सम्मानित रहे। साहित्य अध्ययन में भी उनकी गहरी रुचि थी, जिसका संस्कार उन्होंने अपने बच्चों में भी दिया।
उनकी बड़ी पुत्री श्रीमती श्रद्धा सरवटे शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, सीहोर में सेवाएं दे चुकी हैं। पुत्र श्री धनंजय कानडे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सरोकारों से जुड़े हैं। छोटी पुत्री डॉ. अनामिका सारस्वत शासकीय कन्या महाविद्यालय, रतलाम में अर्थशास्त्र की प्राध्यापक हैं। दामाद श्री गिरीश सारस्वत सैलाना के सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्य हैं। पुत्रवधू प्रोफेसर अनुभा कानडे शासकीय महाविद्यालय, सैलाना में रसायन शास्त्र की प्राध्यापक हैं। बड़े दामाद विद्युत मंडल उज्जैन से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके पोते-पोतियां एवं नातिन भी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
समाजसेवी गोविंद काकानी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 4 बजे श्री कानडे के निधन का समाचार प्राप्त होते ही डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मूथा सहित संबंधित अधिकारियों को देहदान की व्यवस्थाओं के लिए सूचना दी गई। बुधवार सुबह मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन की ओर से उनके निवास स्थान पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सनसिटी स्थित निवास से अंतिम यात्रा मेडिकल कॉलेज पहुंची।
मेडिकल कॉलेज में प्रभारी डीन डॉ. जगदीश चंद्र हुंडेकरी, मानव संरचना विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंगरौले, डॉ. पंकज महावर, डॉ. अनिल पटेल सहित चिकित्सकीय एवं स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति में श्री कानडे की देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु मेडिकल कॉलेज ने अपनी अभिरक्षा में ग्रहण की। इस अवसर पर नेत्रदान विभाग प्रभारी रशेंद्र सिसोदिया, राजवंश एवं नेत्रदान टीम भी उपस्थित रही।
शोकसभा को संबोधित करते हुए समन्वय परिवार के सदस्य गोविंद काकानी ने बताया कि श्री शरद जी ने हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर में प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर परम पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद जी गिरी से दीक्षा ली थी तथा अनेक वर्षों तक वहां सेवाएं प्रदान कीं।
अंतिम विदाई के अवसर पर समन्वय परिवार, प्रभु प्रेमी संघ, काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, जिला प्रशासन, जिला पुलिस प्रशासन, डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज, महाराष्ट्र समाज, नेत्रम संस्था, क्षेत्रीय रहवासी संघ एवं शिक्षा जगत के सदस्यों ने गायत्री मंत्र के पश्चात पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *