मुख्यमंत्री की घोषणा के लगभग दो वर्ष बाद भी जैन कल्याण बोर्ड का गठन नहीं

विश्व जैन संगठन ने शीघ्र अधिसूचना जारी करने की मांग की

नई दिल्ली । विश्व जैन संगठन ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी से दिनांक 21 सितंबर 2024 को भोपाल में की गई जैन कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा को शीघ्र अमल में लाने तथा बोर्ड के गठन की अधिसूचना तत्काल जारी करने की मांग की है।
विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय जैन ने कहा कि 21 सितंबर 2024 को भोपाल में आयोजित क्षमावाणी महोत्सव के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी द्वारा जैन समाज के हित एवं कल्याण के लिए जैन कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा की गई थी। जैन समाज ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे जैन धर्म, संस्कृति, साहित्य, पुरातत्व एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना था।
संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आकाश जैन के अनुसार, घोषणा को लगभग दो वर्ष पूरे होने के बावजूद अभी तक जैन कल्याण बोर्ड के गठन संबंधी अधिसूचना जारी नहीं हुई है तथा अध्यक्ष, सदस्यों एवं अन्य आवश्यक पदों पर नियुक्तियां भी नहीं की गई हैं। इससे मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के क्रियान्वयन को लेकर जैन समाज में निराशा है।

जैन संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण के लिए आवश्यक है जैन कल्याण बोर्ड
विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री श्री राहुल जैन नोएडा ने कहा कि जैन समाज भारत की प्राचीन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परंपराओं का महत्वपूर्ण संवाहक रहा है। अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांत, करुणा एवं जीवदया जैसे जैन सिद्धांतों का भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक जीवन पर व्यापक प्रभाव रहा है।
संगठन की युवा प्रकोष्ठ इंदौर के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि मध्यप्रदेश में अनेक प्राचीन जैन मंदिर, तीर्थक्षेत्र, प्रतिमाएं, शिलालेख, पुरातात्विक अवशेष एवं धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरें मौजूद हैं। इनके संरक्षण, दस्तावेजीकरण और संवर्धन के लिए एक समर्पित संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है।
संगठन ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में जैन समाज के कल्याण एवं धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राजस्थान में श्रमण संस्कृति बोर्ड, आंध्र प्रदेश में जैन कल्याण बोर्ड, झारखंड में राज्य दिगम्बर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड तथा महाराष्ट्र में जैन अल्पसंख्यक आर्थिक विकास निगम जैसी व्यवस्थाएं इसके उदाहरण हैं।

बोर्ड के माध्यम से हो सकेंगे महत्वपूर्ण कार्य
विश्व जैन संगठन के इंदौर संयोजक श्री पारस जैन एडवोकेट के अनुसार प्रस्तावित जैन कल्याण बोर्ड के माध्यम से—

  • जैन संस्कृति, परंपराओं एवं धार्मिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन।
  • प्राचीन एवं ऐतिहासिक जैन मंदिरों और तीर्थस्थलों के संरक्षण हेतु योजनाएं।
  • प्राचीन जैन प्रतिमाओं, शिलालेखों एवं पुरातात्विक सामग्री का संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण।
  • प्राकृत भाषा, जैन साहित्य एवं प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण तथा अध्ययन को प्रोत्साहन।
  • जैन धर्म, दर्शन, इतिहास एवं संस्कृति पर शोध करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन।
  • जैन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ समन्वय।
  • युवा पीढ़ी को जैन संस्कृति एवं विरासत से जोड़ने के लिए शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • जैन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का डिजिटल रिकॉर्ड एवं अभिलेखागार तैयार करना।
  • जैन धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं को आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग।
  • शासन और जैन समाज के बीच प्रभावी समन्वय तंत्र विकसित करना।

मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग
विश्व जैन संगठन ने मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से ज्ञापन भेजकर मांग की है कि 21 सितंबर 2024 की घोषणा को शीघ्र क्रियान्वित करते हुए जैन कल्याण बोर्ड की अधिसूचना तत्काल जारी की जाए। साथ ही बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों सहित आवश्यक पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं तथा बोर्ड को स्पष्ट कार्यक्षेत्र, आवश्यक अधिकार एवं पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
संगठन ने स्पष्ट किया कि जैन कल्याण बोर्ड का गठन किसी अन्य समुदाय के अधिकारों या हितों को प्रभावित करने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश में निवासरत जैन समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण तथा उसके कल्याण के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है।
विश्व जैन संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जैन कल्याण बोर्ड का शीघ्र गठन जैन समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के साथ-साथ प्रदेश की प्राचीन जैन संस्कृति, प्राकृत भाषा, साहित्य, पुरातत्व एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक एवं दूरगामी कदम सिद्ध होगा। उक्त जानकारी आकाश जैन राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी विश्व जैन संगठन ने दी।

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