वैर मिटाकर मैत्री अपनाना है संवत्सरी महापर्व

150 श्रावक-श्राविकाओं ने अंगीकार किया पौषध

सीतामऊ (नयन जैन)। पर्युषण महापर्व की साधना का चरम दिवस संवत्सरी महापर्व श्रद्धा और धर्म आराधना के साथ मनाया गया। चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी श्री रत्नऋद्धि श्रीजी म.सा. एवं साध्वी श्री रत्नवृद्धि श्रीजी म.सा. की पावन प्रेरणा से नगर में धर्म आराधना का विशेष वातावरण रहा।
संवत्सरी पर पहली बार ऐतिहासिक संख्या में लगभग 150 श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध व्रत अंगीकार किया। सभी ने उपाश्रय में निवास करते हुए जाप, ध्यान, प्रतिक्रमण, सामायिक एवं विभिन्न धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से आत्मसाधना की। समाजजनों के अनुसार सीतामऊ में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पौषध व्रत होना पहली बार हुआ। श्रीसंघ के विभिन्न परिवारों द्वारा एकत्रित प्रभावना पौषध आराधकों को बहुमान स्वरूप भेंट करने का लाभ हेमंतकुमार-केशरबाला जैन एवं नयन-साक्षी जैन व कल्प जैन (बोहरा) परिवार ने लिया।

साध्वी श्री रत्नऋद्धि श्रीजी म.सा. एवं साध्वी श्री रत्नवृद्धि श्रीजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि संवत्सरी आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि का पावन अवसर है। मन से वैर, क्रोध, अहंकार एवं कटुता दूर कर सभी जीवों के प्रति मैत्री और क्षमा का भाव रखना चाहिए। संवत्सरी हमें दूसरों से क्षमा मांगने के साथ उन्हें हृदय से क्षमा करना भी सिखाती है। वैर को वैर से नहीं, बल्कि क्षमा और मैत्री से समाप्त किया जा सकता है।

आज से तपस्या महोत्सव का होगा शुभारंभ –
इसी धर्ममय वातावरण में चातुर्मास 2026 के अंतर्गत आज से दो दिवसीय तपस्या महोत्सव का शुभारंभ होगा। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा आयोजित महोत्सव में तपस्वियों का बहुमान एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
16 सितंबर बुधवार को प्रातः 7:30 बजे सामूहिक पारणा, शाम 7 बजे चौबीसी एवं रात्रि 8 बजे प्रभु भक्ति होगी। 17 सितंबर गुरुवार को प्रातः 8 बजे श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर से पोरवाल मांगलिक भवन तक भव्य रथयात्रा एवं वरघोड़ा निकाला जाएगा। इसके बाद प्रवचन एवं साधर्मिक भक्ति का आयोजन होगा।

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