अर्धरात्रि में भी नहीं रुकी सेवा की मिसाल, कमला बाई पोरवाल के नेत्रदान से दो जीवनों में लौटेगा उजियाला

जावरा में 20वां नेत्रदान संपन्न, डॉ. दादरवाल ने निभाई प्रक्रिया; परिजनों की सहमति और प्रेरकों के प्रयास से हुआ पुनीत कार्य

जावरा। सेवा और मानवता की भावना समय की मोहताज नहीं होती। जावरा में देर रात ऐसा ही प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया, जब कमला बाई पोरवाल के निधन के बाद अर्धरात्रि में उनके नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। यह जावरा क्षेत्र में 20वां नेत्रदान रहा।
नेत्रदान की सूचना मिलते ही डॉ. दादरवाल साहब ने अपनी सेवा तत्परता दिखाई और नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए पहुंचे। शेखर भैया उन्हें लेकर सोमवारिया स्थित लसुडिया वाला पोरवाल परिवार के घर पहुंचे, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार की सहमति से कमला बाई पोरवाल के नेत्रदान का यह पुनीत कार्य संपन्न हुआ।

रात के सन्नाटे में मानवता की मिसाल
अर्धरात्रि में नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न होना अपने आप में सेवा भावना का उदाहरण रहा। परिजनों ने दुःख की घड़ी में भी नेत्रदान का निर्णय लेकर यह संदेश दिया कि किसी के जाने के बाद भी उसकी आंखों से किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला आ सकता है।
इस नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने में रणजीत सिंघल, भूरू गोखरू, नितेश धनोतिया एवं पप्पू सिंह राठौड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनके निरंतर प्रयासों और प्रेरणा से नेत्रदान जैसे मानवसेवा के कार्य को आगे बढ़ाने में सहयोग मिल रहा है। जावरा में नेत्रदान की मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है। कमला बाई पोरवाल का नेत्रदान इस श्रृंखला का 20वां नेत्रदान रहा। इस अवसर पर सेवा से जुड़े लोगों ने आमजन से भी अपील की कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी का माध्यम बनें।
कमला बाई पोरवाल का नेत्रदान उनके परिवार के लिए श्रद्धांजलि का भावुक क्षण होने के साथ-साथ समाज के लिए मानवता, सेवा और संवेदना का प्रेरणादायी संदेश भी बन गया।

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