क्षमापना आत्मा को हल्का करने और कर्मों की निर्जरा का पर्व – श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा

रतलाम 17 सितंबर। खेत में फसल आती है, तो बीच में घास भी उग आती है। घास बीज को आगे बढने और फलने नहीं देती, इसलिए उसे उखाडना पडता है और इसे निन्दना कहते है। निन्दना का मतलब अनावश्यक को उखाड फेंकना है। खेत की घांस की तरह हमे भी पापों की निन्दना करना है। पाप भारी होते है। उनकी जैसे-जैसे निन्दना करोगे, वैसे-वैसे उनका बोझ कम होगा और मन हल्का हो जाएगा।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि पाप से मन अशांत रहता है। इसलिए उसकी निन्दना मन से करनी चाहिए। मन को सदैव स्वच्छ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंधन दो तरह से होते है। सुई को अलग-अलग तार में डालते है, तो जब चाहे निकाल सकते है, लेकिन यदि सुईयों को अग्नि में डाल दिया जावे, तो वे एकमेव होकर लोहे का गोला बन जाती है। उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। उन्हें अलग करने के लिए फिर हथोडे की मार अथवा अग्नि का सहारा लेना पडता है, तब सुईया अलग होती है। मानसिक निन्दा में इसी प्रकार अलग-अलग पाप को याद कर पश्चाताप किया जाता है। पाप को यदि अच्छा मान लिया, तो वे लोहे के गोले की तरह एक हो जाते है। पाप को निन्दा से ही अलग किया जाता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि पाप स्वीकार करने, पश्चाताप करने से आत्म दृष्टि खुलती है। इसलिए सबकों आत्मा से साक्षात्कार करने के लिए पापों को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। प्रवचन के दौरान प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा एवं सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

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