सफलता की कहानी – 101वीं बार रक्तदान कर आशीष पाठक ने दिया सेवा का संकल्प

मां की रक्त की कमी से हुई मृत्यु ने जगाई नियमित रक्तदान की प्रेरणा

रतलाम । सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नगर निगम परिसर रतलाम में आयोजित रक्तदान शिविर में श्री आशीष पाठक ने 101वीं बार रक्तदान कर मानव सेवा के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत किया। उनका यह रक्तदान अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी संदेश है कि नियमित रक्तदान कर जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने में योगदान दिया जा सकता है।
श्री पाठक ने बताया कि उनकी माता का निधन रक्त की कमी के कारण हुआ था। इस घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से रक्तदान करेंगे, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त की कमी के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। इसी संकल्प के साथ उन्होंने वर्ष 1992 में जून माह में 18 वर्ष 4 माह की उम्र में पहली बार रक्तदान किया था।
श्री पाठक का रक्त समूह एबी नेगेटिव है, जो अपेक्षाकृत दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल है। वे रक्तदान के लिए रतलाम के साथ ही इंदौर, मंदसौर, मुंबई, दिल्ली और दाहोद सहित विभिन्न स्थानों तक जा चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रिका समाचार पत्र के रतलाम संस्करण में संपादक के रूप में कार्यरत हैं।
101वीं बार रक्तदान करने के अवसर पर श्री पाठक ने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने का माध्यम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान के लिए आगे आएं और सेवा के इस कार्य में अपनी भागीदारी निभाएं। श्री पाठक की 101वीं बार रक्तदान की यह उपलब्धि सेवा संकल्प अभियान की भावना को सार्थक करती है और समाज के अन्य लोगों को भी नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करती है।

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