महक कला साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच का आयोजन, संस्था महक रतलाम की धरोहर – डॉ रत्नदीप निगम

रतलाम । नगर की अग्रणी संस्था महक द्वारा एक विशाल सामाजिक समरसता काव्य रस धारा का आयोजन गुलाब चक्कर में संपन्न हुआ, जिसमें नगर के वरिष्ठ साहित्य कार कवि गीत कार शायर, एवं नवोदित साहित्यिक प्रतिभाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था अध्यक्ष मोड़ी राम सोलंकी एकांत द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर, समस्त अतिथियों का पुष्पमाला से स्वागत किया । आरंभ में,सोलंकी ने संस्था के २५ साल के कार्य काल तथा संस्था के उद्देश्य की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर रत्नदीप निगम ने कहा कि साहित्यकार अपनी कविता गीत ग़ज़ल के माध्यम से समाज में समरसता का संदेश पहुंचा रहे हैं जो प्रशंसनीय है। उन्होंने ये भी ‌कहा कि साहित्य के क्षेत्र में राजनीति का समावेश नहीं होना चाहिए।संस्था महकद्वारा लगातार राष्ट्रीय कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी का अलख जगाया जा रहा है, जो अनुकरणीय है। संस्था महतक रतलाम की धरोहर बन चुकी है, जो बधाई की पात्र है।
मुख्य अतिथि डॉक्टर गीता दुबे ने कहा संस्था महक अपने आप में एक अनूठी संस्था है जो निस्वार्थ भाव से विविध कार्यक्रम करती है ,रतलाम ही नहीं संपूर्ण देश में संस्था अपनी पहचान बना चुकी है। नवोदित रचनाकारों को संस्था मंच प्रदान कर उन्हें होंसला देरही है जो तारीफ के काबिल है। वरिष्ठ साहित्यकार एवं मार्गदर्शक डॉक्टर प्रदीप सिंह राव ने कहा कि संस्था महक ने नगर में एक नया साहित्यिक वातावरण तैयार किया है। इसको मैं स्वर्णिम सौगात मानता हूं, जो नगर के हर नागरिक को पढ़ने का एवं साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने का अवसर प्रदान कर रही है। संस्था ने रतलाम में एक नया इतिहास रच दिया है, जो याद किया जाएगा।, शिक्षाविद् दिनेश शर्मा ने कहा कि संस्था के कार्यक्रम राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत है। इसमें हर जगह आपको राष्ट्र ही दिखाई देगा, देश के प्रति सच्चा प्रेम आपको संस्था महक में देखने को मिलेगा। इस काव्य रस धारा में नगर के चर्चित एवं नवोदित रचनाकारों द्वारा काव्य पाठ किया गया जो इस प्रकार है। राधाकिशन सतवानी” कैसी है नैतिकता यहां, कैसी है निष्ठा यहां राजनीति अवसरवादी, गिरवी स्वाभिमान है”, सुनील निरंजनी “कितनी महक से महकेगी यह समरसता पुष्प धारा मोहब्बत का एक दीप जला कर तो देखो” ‌,शायर अब्दुल सलाम खोकर ने “उसके जन्म से उसकी विदाई के वक्त तक,बेटी रही तो घर में उजाले बहुत रहे” , सपना पिरोदिया ने “यह वही जुबान है जो करती प्यार का इजहार,और इसी जुबान ने खड़ी की यारी रिश्तेदारी में बिना इट की दीवार ” ,हरिशंकर भटनागर ने “अपने गांव की गलियों को याद रखना” कविता का पाठ किया। कार्यक्रम में इन रचनाकारों द्वारा भी अपने रचना पाठ से श्रोताओं के दिल गुदगुदाया और समरसता का संदेश दिया। संजय परसाई सरल, अलक्ष चंद्र व्यास, शिवराज सिंह, योगेंद्र पुरोहित ,श्री राम दवे ,आई एल पुरोहित, जफर कुरेशी लक्ष्मीबाई राव ,निसार रंभा पुरी ,श्रवण चौहान ,ऐश्वर्य भट्ट, हीरालाल खराड़ी ,प्रभु लाल रावल ,दिलीप जोशी, शिवलाल चोहान शिव, यू एल जायसवाल, योगेंद्र पुरोहित, दिलीप वर्मा आदि रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में नवोदित रचनाकारों का उत्साह देखने लायक था ।इस अवसर पर नगर के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षाविद् दिनेश शर्मा एवं आभार सुनील निरंजनी द्वारा माना गया।

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