(दीक्षा दिवस पर विशेष)


धर्मानगरी इंदौर की वसुंधरा बहुत पुण्यशाली एवं धरा पर रहने वाले लोग भी सौभाग्यशाली हैं कि आज उन्हें श्रमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के सुशिष्य, जगत पूज्य निर्यापक महाश्रमण सुधा सागर जी महाराज का 44 वां मुनि दीक्षा दिवस उनकी ही ससंघ सन्निधि में मनाने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।उत्कृष्ट क्षयोपशमधारी मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज कोई सामान्य संत नहीं हैं। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व बहुत प्रभावशाली है एवं उनका ज्ञान घाट तीनों लोकों के ज्ञान से लबालब भरा है उसी के फल स्वरुप आप जैन धर्म के प्रचार, आध्यात्मिकता और अपने ओजस्वी प्रवचनों एवं लोगों की जिज्ञासाओं के समाधान के लिए देशभर में जाने जाते हैं। प्रतिदिन संध्या जिनवाणी चैनल पर आपका बहुचर्चित कार्यक्रम जिज्ञासा समाधान का लाइव प्रसारण होता है जिसे चैनल के माध्यम से 130 देशों में रह रहे लाखों लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से देखते हैं।
मुनिश्री तीर्थ उद्धारक हैं और आपके मार्गदर्शन में स़ौ से अधिक जैन तीर्थों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार हो चुका है। युवाओं के चहेते मुनि श्री ने हजारों युवकों को प्रतिदिन देवदर्शन, अभिषेक, पूजन एवं शांति धारा करने की प्रेरणा देकर उन्हें न केवल धर्म की ओर आकर्षित किया बल्कि उनके जीवन की दिशा और दशा भी बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह भी किया। युवाओं में धर्म संस्कार एवं उनके हृदय में दया,करुणा और वात्सल्य का बीजारोपण हो इस उद्देश्य से प्रतिवर्ष आपके सानिध्य में पर्यूषण पर्व में 10 दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन भी किया जाता है जिसमें 5 से 6 हजार शिविरार्थी सम्मिलित होते हैं और अनुशासित एवं संयमित साधु समान जीवन जीते हुए धर्म और संस्कारों की शिक्षा प्राप्त करते हैं।
21 अगस्त 1958 को सागर जिले के ग्राम इशुरवारा के धर्मनिष्ठ श्रावक श्री रूपचंद जी एवं श्रीमती शांति बाई के घर आंगन में जन्मे जय कुमार (ग्रहस्थ नाम) ने मात्र 20 वर्ष की युवावस्था में दिनांक 20 अक्टूबर 1978 को दिगंबर जैन तीर्थ नैनागिर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर धर्म साधना करते हुए वर्ष 1980 में छुल्लक दीक्षा, वर्ष 82 में ऐलक दीक्षा एवं 29 सितंबर 1983 को मोराजी (सागर) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से जैनेश्वरी मुनि दीक्षा लेकर नगर नगर और डगर डगर पद त्राण विहीन चरणों से पद बिहार करते हुए जैन धर्म का डंका बज रहे हैं।
मिनी बुंदेलखंड के रूप में चर्चित छत्रपति नगर में विराजमान जगत पूज्य निर्यापक ऋषि राज सुधा सागर जी महाराज के 44 वें दीक्षा दिवस पर हम उन्हें नमोस्तु करते हुए भावना भाते हैं कि मुनिश्री आज आप मुनि पद पर विराजमान है आने वाले समय में आप आप इससे भी उच्च पद पर आसीन हो और आपका दीक्षा दिवस दीक्षा कल्याण के रूप में हमें मनाने का सौभाग्य प्राप्त हो। इस अवसर पर हम यह भी भावना भरते हैं कि आपका रत्नत्रय सदैव कुशल मंगल रहे और लंबे समय तक हम सबको आपका सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होता रहे इसी शुभ भाव के साथ हम हैं आपके गुण- ज्ञान के सम्मोहन से आकर्षित
डॉ जैनेंद्र जैन
कार्य अध्यक्ष दिगंबर जैन समाज
छत्रपति नगर एवं
राजेश जैन दद्दू
मीडिया प्रभारी दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद
इंदौर।