2011 में इंदौर में जैन आबादी 71 हजार दिखाई, वास्तविक संख्या 3 लाख से अधिक – प्रशासन से पारदर्शी गणना की मांग

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 में जैन समाज की वास्तविक जनसंख्या के सही व सटीक आंकड़े दर्ज कराने के लिए सामाजिक स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के संवाहक मयंक जैन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर जिला प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपते समय प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट राजीव जैन, गिरीश जैन एवं धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन ‘दद्दू’ विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि 2027 की जनगणना में जैन समाज के आंकड़ों को लेकर पूर्व में हुई तकनीकी त्रुटियों को न दोहराया जाए।
2011 के आंकड़े बनाम वास्तविक स्थिति –
ज्ञापन में 2011 की जनगणना रिपोर्ट में मौजूद गंभीर विसंगतियों को रेखांकित किया गया। वर्ष 2011 की जनगणना में इंदौर जिले में जैन समुदाय की कुल आबादी मात्र 71,667 दर्ज की गई थी, जो इंदौर की कुल जनसंख्या का लगभग 2.19% ही दर्शाती है। जबकि जैन समाज के स्थानीय निकायों, ट्रस्टों और सामाजिक सर्वेक्षण के अनुसार इंदौर में जैन समाज की आबादी दर्ज संख्या से 3 से 5 गुना अधिक है। अनुमानित तौर पर इंदौर और उसके आसपास के क्षेत्रों में जैन समाज की जनसंख्या 3 लाख से 3.5 लाख से भी अधिक है।
आंकड़ों में अंतर के प्रमुख कारण –
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने वे कारण भी रखे जिनकी वजह से संख्या कम दर्ज हो जाती है। पहला – धार्मिक कोड में अस्पष्टता, कई बार प्रगणक या परिवार के सदस्य धर्म के कॉलम में स्पष्ट ‘जैन’ दर्ज कराने के बजाय उपनाम या अन्य आधार पर प्रविष्टि कर देते हैं। दूसरा – श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी, मूर्तिपूजक आदि पंथों के उल्लेख के कारण मूल ‘जैन’ धर्म कोड दर्ज करने में भ्रम बन जाता है। तीसरा – जमीनी स्तर पर आम नागरिकों और जनगणना कर्मचारियों के बीच सही जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन का अभाव।
संघ की प्रमुख मांगें –
संघ ने प्रशासन से मांग की है कि जनगणना 2027 के लिए तैनात होने वाले प्रगणकों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए कि धर्म के कॉलम में ‘जैन’ दर्ज करते समय किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि न हो तथा डेटा प्रविष्टि के दौरान पारदर्शी सत्यापन व्यवस्था अपनाई जाए।
देशभर के जैन समाज से आह्वान –
ज्ञापन सौंपने के पश्चात संघ के संवाहक मयंक जैन ने पूरे देश के जैन समाज से आह्वान किया कि आगामी 2027 की जनगणना में समाज का प्रत्येक परिवार स्वयं जागरूक रहे और यह सुनिश्चित करे कि गणना पत्रक के धर्म कॉलम में ‘जैन’ ही दर्ज हो। यह जागरूकता अभियान केवल इंदौर तक सीमित न रहकर संपूर्ण भारतवर्ष में चलाया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है सही जनगणना?
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह विषय केवल आंकड़ों का नहीं है, बल्कि जैन समाज के सांस्कृतिक और धार्मिक अस्तित्व की रक्षा, अल्पसंख्यक अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं के सुचारू लाभ तथा भविष्य की शैक्षणिक, धार्मिक एवं सामाजिक नीतियों के निर्माण का आधार स्तंभ है। संघ ने विश्वास जताया है कि इंदौर प्रशासन इस अति-संवेदनशील विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए उचित दिशा-निर्देश जारी करेगा।