अ.भा.जैन दिवाकर विचार मंच और अ. भा.जयणा मंगल ग्रुप की अभिनव पहल
जावरा (अभय सुराणा) । कहते हैं कि समुंदर शब्द अधूरा है क्योंकि समुंदर की कोई गहराई नहीं होती अगर यही गहराई मानवता की हर मानव के अंदर बस जाए बस मेरे शब्दों के माध्यम से सिर्फ इतना सा प्रयत्न है कि अगर किसी भी संस्था या अन्य के माध्यम से बेजुबा पक्षियों की खामोशी सुनते हुए समझते हुए अगर अपनी जिंदगी का एक अहम हिस्सा समझ ले तो शायद पुराने वह नजारे भी दिखाई दे फिर से जैसे की शाम होती है और कुछ पंछियों की भीड़ एक दूसरे के पीछे, अपने घर की वापसी यह बयां करती हे कि शाम हो गई है लेकिन ऐसे नजारे बहुत ही कमी से आजकल नजर आते हैं वजह सिर्फ इतनी सी है कि अब वह जंगल ना रहे और वह पंछियों की भीड़ क्योंकि इन दिनों पंछियों का घर बना हुआ है घर के बाहर का बगीचा या तो आसपास के छोटे बड़े पेड़ पौधे जो बचे हुए हैं अब तक वहां अक्सर चले आते है छत पर अपनी उम्मीद लिए अपनी प्यास वह अपनी भूख मिटाने के लिए वह पक्षी जो अक्सर अपनी खामोशी में बहुत कुछ कह जाते हैं बेजुबा होने के बाद भी। जावरा सरल स्वभावी वात्सल्य वारिधि शांति दूत परम पूज्य वागड़ विभूषण आचार्य भगवंत श्री मृदुल रत्न सागर सुरिश्वरजी महाराजा एवं राष्ट्रसंत श्री कमल मुनि “कमलेश” महाराज साहब की प्रेरणा से अ. भा.जयणा मंगल ग्रुप एवं अ.भा.जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अभय सुराणा के नेतृत्व में आज बेजुबान पक्षियों के दाना पानी के लिए घर-घर जाकर सबको सकोरे बांटे गए तथा उनसे आग्रह किया गया कि आप को नियमित रूप से इस में पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करना है ।सर्वधर्म समभाव की भावना का सम्मान करते हुए सभी संप्रदाय के लोगों ने आगे रहकर सकोरे प्राप्त किए आज सकोरे बांटने में श्रीमती चंचल श्रीमाल एवं ज्योति गंगवाल का सहयोग सराहनीय रहा।इस अवसर पर अ.भा.जैन दिवाकर विचार मंच के जिलाध्यक्ष सुशील कोचटा ने सकोरे बाटते हुए लोगों को दो गज की दूरी मास्क हे जरूरी एवं लॉकडाउन का पालन करने का अनुरोध भी किया ।कार्यक्रम को गरिमा प्रदान करने के लिए शिवकुमार सेठिया अनिल पगारिया श्रीमती आशा कोचट्टा श्रीमती सपना कोचट्टा श्रीमती सलोनी जैन हर्ष कोचट्टा पंकज पगारिया परमानंद पोरवाल ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।