तन बल और मन बल से कोई सुखी नहीं हो सकता, आत्म बल ही सारे वास्तविक सुखों का नाथ-प्रवर्तकश्री

रतलाम,09 अक्टूबर। जहां सारे बल हताश और निराश हो जाते है, वहां आत्मबल ही काम आता है। तपस्वी आत्मबल से ही बडे तप की और आगे बढते है। संसार में धन बल, तन बल और मन बल से कोई सुखी नहीं हो सकता, आत्म बल ही सारे वास्तविक सुखों का नाथ होता है।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंन कहा कि मुंबई के वालकेश्वर क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित गुजराती भाई लाखों की संपत्ति होने के बावजूद वह दुःखी थे। इससे स्पष्ट है कि संसार में धन, तन और मन के बल से कोई भी पूर्ण रूप से सुखी नहीं हो सकता। जीवन की आधि-व्याधि और उपाधियों का इलाज भौतिक संसार में नहीं है, हर व्यक्ति को अपने कर्मों का कर्ज चुकाना ही पड़ता है।
प्रवर्तकश्री ने धर्म को जोडने वाला और पंथ को तोडने वाला बताते हुए कहा कि पंथ मनुष्य को भटका सकता है, लेकिन धर्म हमेशा तारता है। परमात्मा के कण-कण में सभी जीवों के प्रति वात्सल्य भाव है। जिस प्रकार माँ के स्तन में पुत्र के प्रति वात्सल्य उमड़ने से रक्त दूध में बदल जाता है, उसी प्रकार तीर्थंकरों का वात्सल्य भाव एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तक के समस्त जीवों के प्रति होता है। धर्मसभा को प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने भी संबोधित किया। संचालन प्रकाश मूणत ने किया। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

तपस्वी मुस्कान-महेश कटकानी का अभिनंदन
शुक्रवार को भाग्य से सौभाग्य की और चातुर्मास में श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा की प्रेरणा से मासक्षमण का एक और दीर्घ तप मुस्कान-महेश कटकानी ने पूर्ण किया। श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति ने धर्मसभा में उनका अभिनंदन किया। समिति की और से भोजन समिति के प्रमुख निखिल शाह, महेन्द्र गंग, आयुष गंग विकास चोपडा, विकास मेहता कमल मूणत संजय चौरडिया आदि ने तपस्वी को शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र भेंट किया। खुश्बु पालरेचा राजमल चोपडा, राकेश झामर आदि ने भाव व्यक्त किए। इस मौके पर देश के विभिन्न स्थानों के श्री संघों के प्रतिनिधिगण मौजूद रहें।

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