संत की बंद मुट्ठी लाख की खुल जाए तो आशीर्वाद की-आचार्य प्रसन्नसागर जी महाराज

निमियाघाट/कोडरमा । अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता साधना महोदधि भारत गौरव उभय मासोपासी आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज निमियाघाट के सहस्त्र वर्ष पुरानी भगवान पारसनाथ की वरदानी छांव तले विश्व हितांकर विघ्न हरण चिंतामणि पारसनाथ जिनेंद्र महाअर्चना महोत्सव पर भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए।
अंतर्मना प्रसन्नसागरजी ने कहा:- संत तो सदा ही आशीर्वाद देते हैं संत तो स्वयं आशीर्वाद स्वरुप है संत के चरणों मैं जो भी श्रद्धा और भक्ति से जाता है उसे उनका आशीर्वाद जरूर मिलता है एक बात ध्यान रखना आशीर्वाद अपने आप मिलता है तुम कभी किसी संत से आशीर्वाद मांगना मत बस नमन और प्रणाम करते जाना तुम्हारा नमन जिस दिन हृदय से होगा उस दिन संत का आशीर्वाद भी तुम पर बरबस बरस जाएगा आशीर्वाद तो वही है जो हृदय फूटे लेकिन इसके लिए नमन भी तो नाभि से फूटना चाहिए
आचार्य अंतर्मना प्रसन्नसागर जी ने कहा:- की मैं एक सज्जन को जानता हूं जो अक्सर मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि मुझे आशीर्वाद दो और यदि मैं उनके सिर पर हाथ नहीं रखता हूं तू वे मेरा हाथ पकड़ कर जबरदस्ती अपने सिर पर रखवा लेते हैं अब यह तो कोई आशीर्वाद नहीं हुआ आशीर्वाद तो वही है जो सहज संत के हृदय से झरने की तरह फूटे और चारों ओर से तुम पर बरस जाए सहज हाथ सिर पर रख जाए तो आशीर्वाद है तो मैं कहता हूं कि तुम केवल नमन करना और नमन करते जाना एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब तुम्हें संत के हृदय से फूटा आशीर्वाद मिल जाएगा और जिस दिन वह आशीर्वाद कृपा दृष्टि तुम्हें मिल जाए समझना तुम्हारा कल्याण हो गया तुम्हें सब कुछ मिल गया लेकिन यह घटना अचानक होगी और जब भी घटेगी तब ना तो इसकी भनक संत को पड़ेगी और ना ही भक्तों को न तो संत को मालूम होगा कि मैंने भक्तों को आशीर्वाद दे दिया है और न ही भक्तों को पता होगा कि उसे आशीर्वाद मिल चुका है बड़ी रहस्य पुर्ण घटना है जो हमेशा दो ह्रदयो के बीच घटती है फिर भी दोनों ह्रदय अंजान बने रहते हैं । उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, नवीन जैन ने दी।

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