बहुगुणा जी ने प्रकृति से प्रेम करना सिखाया

शिक्षक सांस्कृतिक संगठन ने ऑनलाइन स्वर्गीय बहुगुणा जी को श्रद्धांजलि दी

रतलाम । प्रकृति हमें सब कुछ देती है जीवन का हर सुख प्रकृति पर निर्भर है और अगर इसकी रक्षा हमने समय पर कर ली तो हमारा जीवन सार्थक बन जाता है खास करके पर्यावरण और पर्यावरण के लिए वृक्ष बचाना अत्यंत आवश्यक रहता है । इसी बात का उद्घोष प्रसिद्ध पर्यावरणविद् श्री सुंदरलाल बहुगुणा ने अपने चिपको आंदोलन के तहत किया था उन्होंने देश के लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए जगाया था । एक जन आंदोलन के माध्यम से अपने नैतिक दायित्व का बोध कराया था ऐसे महान समाजसेवी के निधन पर पूरा देश शोकमगन है । शिक्षक सांस्कृतिक संगठन ने ऑनलाइन स्वर्गीय बहुगुणा जी को श्रद्धांजलि दी । जिसमें वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए वरिष्ठ शिक्षाविद पूर्व प्राचार्य ओपी मिश्रा ने कहां की बहुगुणा जी प्रकृति बचाओ का नारा देने वाले पहले व्यक्ति थे । साहित्यकार मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि बहुगुणा जी के निधन से पर्यावरण प्रेमियों को गहरा धक्का पहुंचा है उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य और उसकी महत्ता को प्रतिपादित किया था डॉ. सुलोचना शर्मा ने उन्हें महान समाजसेवी बताते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि बहुगुणा जी का व्यक्तित्व प्रेरणादाई था । पर्यावरण के प्रति लोगों में उन्होंने जागृति पैदा की थी । सर्व श्री कृष्णचंद्र ठाकुर, राधेश्याम तोगडे, दिलीप वर्मा,  श्याम सुंदर भाटी, रमेश उपाध्याय, मदनलाल मेहरा, चंद्रकांत वाफगांवकर, दशरथ जोशी, नरेंद्र सिंह राठौड़, मिथिलेश मिश्रा, अंजुम खान, रक्षा के कुमार, भारती उपाध्याय, कविता सक्सेना, देवेंद्र वाघेला, चंद्रशेखर लश्कर ई आदि ने शोक संदेश प्रेषित किए ।

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