युद्ध की ज्वाला अपने को देखती है ना पराए को उसमें सब स्वाहा हो जाते हैं- राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

मेहसाणा (सिमंधर स्वामी जैन मंदिर 22 मई 2021) । युद्ध की कल्पना करना ही शैतान के लक्षण सोचने मात्र से रोम-रोम कांप उठता है । उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने सिमंधर स्वामी जैन मंदिर व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध की ज्वाला अपने को देखती है ना पराए को उसमें सब स्वाहा हो जाते हैं
राष्ट्रसंत ने कहा कि युद्ध का अर्थ बाल, युवा, वृद्ध, निर्दोष का संहार युद्ध मानवता के लिए अभिशाप है । हर समस्या का समाधान संवाद से हो सकता है अहिंसा की महाशक्ति विश्व को विनाश से बचा सकती है।
जैन संत ने स्पष्ट कहा कि अपने स्वार्थ के लिए हिंसा को उकसाना उसे समर्थन देना शांति की ओट में हथियारों का जखीरा इक_ा करना बारूद के भेद पर बैठकर शांति की कल्पना करने के समान है ।
राष्ट्र संत ने इजरायल फिलिस्तीन युद्ध पर चिंता व्यक्त करते कहा कि विश्व की महा शक्तियों को इसे रोकने के लिए दबाव डालना चाहिए युद्ध निकलने वाला धुआं का दुष्प्रभाव मानव के स्वास्थ्य और पूरी प्रकृति पर पड़ रहा है ।

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