‘‘अपनी-अपनी जातियों के संगठन को सशक्त बनाएँ-गणिनी ज्ञानमती’’


अयोध्या 25 अक्टूबर । रायगंज स्थित दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, अयोध्या में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी माताजी के 93 वें जन्मोत्सव एवं ७५वें संयम दिवस के अवसर पर शरदपूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ झण्डारोहणपूर्वक किया गया। झण्डारोहण करने का सौभाग्य कुलाधिपति श्री सुरेश जैन-मुरादाबाद एवं श्री प्रकाशचंद बड़जात्या-चेन्नई के करकमलों से किया गया। सम्पूर्ण विधिविधान के साथ में भगवान की पूजा-अभिषेक के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत् किया गया। तत्पश्चात् कार्यक्रम के प्रथम दिवस दिगम्बर जैन सर्वजातीय सम्मेलन का आयोजन तीन सत्रों में किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम का मंगलाचरण डॉ. रुचि जैन-दिल्ली के द्वारा किया गया एवं 84 जातियों के सशक्त संगठन के अध्यक्ष एवं मंत्री शाश्वत तीर्थ अयोध्या पर आयोजन में भाग लेने के लिए पधारे हैं। उनके प्रमुख को आमंत्रित करके मंचासीन किया गया। कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी, श्री अरिहंतकीर्ति जी भट्टारक-भरुच, श्री हसमुख जैन गांधी-इंदौर, श्री अमरचंद जैन सर्राफ-लखनऊ आदि अतिथिगणों द्वारा किया गया।
सर्वप्रथम सरस्वती माता एवं लक्ष्मी माता को अर्घ्य अतिथियों द्वारा समर्पित किया गया। इसी क्रम में परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के मुखारविंद से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, जिसमें उन्होंने सर्वजातीय सम्मेलन को एक बहुत बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि आज गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी को इस बात की चिंता है, सभी जातियों का संगठन मजबूत हो एवं सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों में सब एक होकर एक मंच से आयोजन को करें।
श्री विजय कुमार जैन, मंत्री-अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी ने बताया कि चालीस संगठनों के अध्यक्ष एवं उनके प्रमुख लगभग 1000 से ज्यादा की संख्या में समारोह में शामिल होने के लिए पधारे हैं। पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए कि अपनी-अपनी जातियों के संगठनों को सशक्त बनाएं एवं यदि संगठन मजबूत होंगे, तभी आने वाले समय में आपकी पहचान बनी रहेगी। अन्यथा सभी चीजें समय-समय के साथ विलुप्त होती जा रही हैं। हमारे प्राचीन आचार्यों ने ग्रंथों में इस बात की विवेचना की है कि आपकी पहचान आपके संगठन से ही है। आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज के शब्दों को स्मरण करते हुए सद्गृहस्थ होने के साथ-साथ सप्तपरमस्थान का चिंतन समाज को माताजी ने प्रदान किया एवं पूरजोर देते हुए अपनी-अपनी जातियों में शादी-विवाह आदि करने पर जोर दिया।
इसी के साथ मंच पर अतिथि के रूप में श्री सुधांशू कासलीवाल-जयपुर (अध्यक्ष-श्री महावीरजी तीर्थ), श्री राजीव जैन-दिल्ली, प्रो. अनेकांत जैन-दिल्ली, श्री राजीव जैन-दिल्ली उपस्थित थे। इसी क्रम में मुम्बई के प्रसिद्ध फिल्म गायक श्री चिंतन बाकीवाला ने माताजी के ऊपर एक सुंदर भजन की प्रस्तुति दी एवं उसका लोकार्पण आये हुए अतिथियों के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन हसमुख जैन गांधी-इंदौर (महामंत्री) एवं डॉ. जीवन प्रकाश जैन (समन्वयक) के द्वारा किया गया।
सत्र का शुभारंभ सर्वप्रथम वक्ता के रूप में श्री रमेश जी तिजारिया-जयपुर (अग्रवाल जातीय) के संगठन प्रमुख ने अग्रवाल जातीय के उद्गम एवं वर्तमान संख्या का विवेचन करते हुए कहा कि आज गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी हीं अग्रवाल हैं, जिन्होंने अग्रवाल समाज के गौरव को वृद्धिंगत किया है। वर्तमान में अग्रवाल समाज की संख्या लगभग सारे देश में 40 लाख है, ऐसा उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा। खण्डेलवाल जातीय से श्री प्रकाश जी बड़जात्या-चेन्नई, हुमड़ समाज ने श्री विपिन गांधी-इंदौर, बघेरवाल से श्री जैनेन्द्र सावला-इंदौर, जैसवाल से श्री सुबोध जैन-मथुरा, सेतवाल समाज से श्री नितिन नखाते-नागपुर, चतुर्थ एवं पंचम से प्रो. डी. ए. पाटिल-जयसिंहपुर, खरोआ से डॉ.-देवेन्द्र जैन-दिल्ली, पपोरवाड़ से श्री नमिष जैन-इंदौर, वरैया से श्री धर्मचंद जैन-करैरा, काम्बोज से श्री मिलिंद यम्बल-हिंगोली, कठनेरा परिषद से श्री ऋतुराज जैन-भोपाल, पद्मावती पुरवाल-उ.प्र. के श्री मुकेश जैन-फिरोजाबाद, गोलालारिय से डॉ. राहुल जैन-विदिशा से आदि जातियों के महानुभावों ने अपनी-अपनी जाति संगठनों की विवेचना करते हुए उनके इतिहास को बताया।
वर्तमान संख्या एवं जाति गौरव के लोगों के विषय में विवेचना की। प्रथम सत्र के अंत में सर्वजातीय संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पीठाधीश रविन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने कहा कि वर्तमान में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी को इस बात का सदैव विकल्प रहता है कि प्रत्येक जाति का अपना एक संगठन हो, अपना एक मंच हो, अपनी एक बात हो, जिससे हम अलग होकर भी एक हैं, ऐसा पूरे देश और दुनिया में संदेश प्रसारित हो। हम जाति में अलग हैं, लेकिन संगठन में एक हैं। एकता में अनेकता का दर्शन हो, इस सर्वजातीय संगठन का मूल उद्देश्य है।
इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन, संयुक्त महामंत्री दिलीप जैन जयपुर, प्रदेश उपाध्यक्ष राजस्थान धनपाल जैन उदयपुर, एवं देश भर से विभिन्न संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारी आदि उपस्थित ।
पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का जन्म आज से 92 वर्ष पूर्व उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले में टिवैâतनगर ग्राम में शरदपूर्णिमा के दिन लाला छोटेलाल एवं माता मोहिनी देवी की पवित्र कुक्षि से हुआ था। बचपन में माता-पिता ने प्रेम से मैना नाम रखा। नाम का बड़ा प्रभाव रहता है। मैना ने गृहबंधन को तोड़कर वैराग्य पथ पर चलने का निर्णय लिया। बाल्यकाल की शिक्षा टिवैâतनगर ग्राम में सम्पन्न की। बचपन से ही अति धार्मिक प्रवृत्ति की बालिका, जिसने अपने परिवार में सभी को धर्म से जोड़कर रखा, कुरीतियाँ समाज में जो व्याप्त थीं, उनको अपने घर में एवं ग्राम में समाज किया। शनै-शनै जैसे विवाह की उम्र आई, तो मैना ने मन में दृढ़ संकल्प रखा था कि मुझे वैराग्य के पथ पर चलकर अपनी आत्मा का कल्याण करना है। समय के साथ बालिका मैना ने गुरुवर दिगम्बर जैनाचार्य श्री आचार्यरत्न श्री देशभूषण जी महाराज से आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया एवं आचार्य वीरसागर जी महाराज के करकमलों से माधोराजपुरा (जयपुर) राज. में आर्यिका दीक्षा के व्रत ग्रहण करके मैना से ज्ञानमती नाम प्राप्त किया एवं सतत ज्ञान की प्रभावना करते हुए लगभग साढ़े 500 ग्रंथों का सृजन, जिनकी लेखनी के द्वारा किया गया। भगवान महावीर के पश्चात् 2500 साल के इतिहास में इतना विराट साहित्य रचने वाली पहली महान साध्वी हैं। इसी क्रम में हस्तिनापुर (मेरठ) उ.प्र. के विश्व प्रसिद्ध जम्बूद्वीप की रचना का निर्माण मांगीतुंगी (नासिक) महा., भगवान ऋषभदेव की अखण्ड पाषाण में 108 फुट प्रतिमा का निर्माण (गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज), शाश्वत तीर्थ अयोध्या का महा विकास, इसी क्रम में कुण्डलपुर, प्रयाग, माधोराजपुरा, काकंदी, सम्मेदशिखर, भद्दिलपुर, शिर्डी आदि तीर्थों का विकास पूज्य माताजी की प्रेरणा से हुआ है। वर्तमान युग में दिगम्बर जैन समाज की साक्षात् सरस्वतीस्वरूपा माँ को सम्पूर्ण विश्व का अभिनंदन इस शरदपूर्णिमा के महान शुभ अवसर पर 75 वें संयम दिवस एवं 93वीं जन्मोत्सव पर सम्पूर्ण जैन समाज की ओर से माताजी शतायु हों, दीर्घायु एवं सतत् समाज को अपना मार्गदर्शन देती रहें, यही मंगल शुभ भावना है।
युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने अवगत कराया कि 26 अक्टूबर को पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञान मती माताजी के जन्म जयन्ती महोत्सव पर प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव बडी प्रतिमा जी का महामस्तिकाभिषेक आदि विभिन्न धार्मिक व अवार्ड समर्पण कार्यक्रम होंगे।