सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया के संबंध में सीएमई संपन्न

  • नई पीढ़ी में बीमारी के संचरण को रोकना एकमात्र उपाय- डॉ स्वाति पटेल जैन, इंदौर
  • मरीजों की सेवा और जन जागरूकता आवश्यक- श्री गोविंद काकानी

रतलाम 31 अक्टूबर । थैलेसीमिया जन जागरण समिति मध्य प्रदेश, काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन जिला रतलाम, नोवा नॉर्डिक्स, मेडिकल कॉलेज रतलाम एवं स्वास्थ्य विभाग जिला रतलाम के संयुक्त तत्वाधान में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया के संबंध में एकदिवसीय सी एम ई का आयोजन डॉक्टर लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज में किया गया। सीएमई कार्यशाला के दौरान माननीय कैबिनेट मंत्री श्री चैतन्य काश्यप का ऑनलाइन उद्बोधन मैं सिकल सेल एवं थैलेसीमिया मरीजों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं लगातार दी जा रही है और भी आवश्यक सुविधा देने का आश्वासन दिया।
डॉ स्वाति पटेल जैन पेडियाट्रिक हेमेटोलॉजिस्ट ऑंकोलॉजिस्ट अरविंदो मेडिकल कॉलेज इंदौर ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया अनुवांशिक विकार है , थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया के व्यक्ति को देखकर पहचानना संभव नहीं है, इसके लिए रक्त परीक्षण की जांच अनिवार्य है। सिकल सेल वाहक व्यक्ति में रोग के चिन्ह लक्षण प्रकट नहीं होते हैं इसलिए उन्हें खुद भी नहीं पता होता कि वह इस बीमारी के वाहक है और अनजाने में आगामी पीढ़ी में बीमारी का प्रसार हो जाता है। सिकल सेल के वाहक स्त्री और पुरुष, सिकल सेल के डिसीज पुरुष और स्त्री को, सिकल सेल के डिसीज और वाहक स्त्री पुरुष को आपस में विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन परिस्थितियों में आने वाली पीढ़ी में रोगों का संचरण निश्चित रूप से होता है । किंतु सिकल सेल वाहक व्यक्ति के सामान्य व्यक्ति के साथ विवाह होने पर रोग की संभावना कम रहती है तथा इसके प्रसार को रोका जा सकता है, इसलिए विवाह करने से पहले कुंडली मिलाने की बजाय रक्त की जांच आवश्यक रूप से करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि रोग के सामान्य लक्षण खून की कमी, पीलिया, शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द , कमजोरी आदि है। शरीर के जिस अंग की लाल रक्त कोशिका का आकार हंसिए जैसा हो जाता है उसे अंग में ब्लॉकेज आता है। इससे पीड़ित लोग पानी अधिक से अधिक पिए , नींबू पानी , सोयाबीन, अलसी , दाले, मांसाहार करने वाले लोगों के लिए अंडा ,मछली, मांस आदि का सेवन करना ठीक रहता है। इसके उपचार के रूप में हाइड्रोक्सी यूरिया ,फोलिक एसिड, पोषण संबंधी सप्लीमेंट्स का उपयोग किया जाता है। इसके मुख्य रूप से दो इलाज बोन मेरू ट्रांसप्लांट और जीन थेरेपी से बीमारी ठीक की जा सकती है। बोन मेरू ट्रांसप्लांट का मैचिंग व्यक्ति मिलने पर उपचार हो जाता है। वर्तमान में जीन थेरेपी की सुविधा भारत में उपलब्ध नहीं है, विदेश में यह उपचार अत्यंत महंगा है।
काकाणी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से श्री गोविंद काकानी ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया पर नियंत्रण से स्वस्थ भारत के निर्माण की संकल्पना साकार होगी। अध्यक्ष श्री माधव काकानी ने सभी आशा कार्यकर्ताओं से सभी गर्भवती महिलाओं और आमजन की सिकल सेल संबंधी रक्त जांच करने के लिए प्रेरित करने की बात कही। थैलेसीमिया जागरण समिति के श्री सत्येंद्र राठौर ने कहा कि उनकी संस्था द्वारा अब तक 84 मरीजो का निशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जा चुका है उन्होंने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सभी लोगों से डोनर लाइब्रेरी के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 582 लोग द्वारा बोन मैरो ट्रांसप्लांट डोनर के रूप में पंजीकृत हैं ।
मेडिकल कॉलेज की डीन डॉक्टर अनीता मुथा ने अधिक से अधिक लोगों से रेयर ब्लड ग्रुप का ब्लड डोनेशन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज रतलाम में पीसीआर लैब का कार्य पूरा होने वाला है इसके संबंध में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए भोपाल प्रस्ताव प्रेषित कर दिया गया है । इस प्रकार केंद्र के विकसित होने के बाद ब्लड सैंपल की जांच के लिए बाहर नहीं भेजने होंगे। सीएमएचओ डॉक्टर किरण वाडीवा ने बताया कि रतलाम जिले में वर्तमान में सिकल सेल के 209 रोगी ( डिसीज़) दर्ज हैं तथा 1788 वाहक है। थैलेसीमिया योद्धा वर्षा पवार ने बताया कि वे स्वयं थैलेसीमिया से पीड़ित होकर पिछले 41 वर्ष से रोग से लड़ रही है और वर्तमान में इसी क्षेत्र में सेवा कार्य कर रही है । कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ ए पी सिंह थैलेसीमिया वार्ड के लिए अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान थैलेसीमिया वार्ड की नर्सिंग ऑफिसर अलका, अर्चना और रानू को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में मध्य प्रदेश जन जागरण समिति के संरक्षक सत्येंद्र सिंह राठौड़ ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं समिति के कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अधीक्षक डॉक्टर प्रदीप मिश्रा, सिविल सर्जन डॉक्टर अखंड प्रताप सिंह ने डेकेयर सेंटर के बारे में एवं जिला चिकित्सालय में मिल रही सुविधाओं के बारे में बताया। नोडल अधिकारी डॉ जितेंद्र जायसवाल ने भी संबोधित किया और प्रश्न मंच के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं, कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर तथा चिकित्सकों, समाजसेवी कार्यकर्ताओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम का संचालन श्री गोविंद काकानी एवं मेडिकल कॉलेज के डॉ ध्रुवैंद्र पांडे ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर प्रमोद प्रजापति , श्री आशीष चौरसिया, नोवा नॉर्डिक्स के श्री रवि तिवारी, श्री सुनील लाठी, सुनीता काकाणी, डॉ स्मृति पांडे, डॉ प्रिया पंवार, डॉ मनोज पालीवाल, डॉ लिखार, टेक्नीशियन दुष्यंत पुरोहित आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *