रतलाम । शहर की युवा टीम कोरोना महामारी में भी बेजुबानों की सेवा के लिए दौड पड़ते है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं ऐसे ही कुछ युवा युवकों की जो एक कॉल पर शहर में कहीं भी श्वानों के बारे में क्रूरता, खाने पीने या बीमार होने की सूचना मिलते ही चाहे दिन हो या रात उनके लिए पहुँच जाते हैं। ज्यादा कुछ होने पर अस्पताल भी ले जाते हैं एवं दवाई गोली का जो भी खर्चा होता है अपनी पॉकेट मनी से करते हैं।
टीम के अर्पित उपाध्याय,दिव्या श्रीवास्तव बताती है कि बहुत कम होते है जो इनकी सेवा के लिए आगे आते हैं हम प्रति दिन एक या अधिक बार बीमार, दुर्घटना से ग्रसित अन्य स्थानों से लाकर छोड़ जाने की सूचना मील जाती हैं। काजल टाक,चंचल मेहता,शुभम सिखवाल, विशाल सक्सेना आदि हमसे जुड़े हुए हैं जो कि कहीं न कहीं किसी संगठन संस्थान के साथ कार्यरत है। हाल ही में कल दो श्वानों के बीमार होने की जानकारी मिलने पर दिव्या, काजल ने पहुँच कर सामाजिक कार्यकर्ता एवं आसपास के नागरिकों की सहायता से उनका नियत स्थान पर ही उपचार करवाया। पहले के समय में जब खाना बच जाता था तो उस खाने (गुडे) या घर के बाहर बने (चाटिए) में डाला जाता था जिससे श्वान पेट भर खाना खाते थे।आज हमारे द्वारा बच्चों के डायपर, गंदी वस्तुओं को खुले स्थान पर फेंका जाता है जो श्वान के द्वारा खाते है जिससे गंदगी होती है और स्वान बीमार हो जाते हैं इसके चलते लोगों के मन में उनके प्रति घृणा बढ़ती जा रही है। जिससे लोगों से नफरत कर उनसे दूर व्यवहार मारते पीटते हैं जिससे उनको कई बार चोट भी लग जाती है जबकि इसके उलट श्वान एक वफादार जानवर होता है कुत्ता कितना भी गुस्सेल क्यों ना हो उसे प्यार से रोटी दे दी जाती है तो आपको अपना मानने लग जाता है एवं आप की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहता है इन्हें बस आपके थोड़ा सा प्यार चाहिए यह आपकी भावनाओं को समझते हैं। हमारा उद्देश्य यही है। इनके प्रति जो लोगों की सोच है उसमें परिवर्तन लाना है। इनके लिए शेल्टर होम के प्रयास किये जा रहे हैं जहां पर दुर्घटना से घायलों को समुचित उपचार के साथ उनकी देखभाल हो सके इसके लिए समाज सेवियों की मदद भी ली जाएगी।