स्वार्थ और भयसे निर्मित सद्भाव क्षणिक होता है उसके परिणाम कटुक होते है- राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

सुरेंद्रनगर अजरामर जैन उपाश्रय । सामाजिक समरसता दिलों में आए बिना मानव का धार्मिकता में प्रवेश नहीं हो सकता उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जैन समाज के 45 संगठनों को अजर अमर जैन उपाश्रय में संबोधित करते कहा कि किसी भी निमित्त से समरसता के भाव खंडित होते हैं मानवीय गुणों का विनाश हो जाता है।
उन्होंने कहा कि समरसता के माध्यम से परस्पर वात्सल्य सद्भाव प्रेम निर्माण होने पर भावनात्मक एकता मजबूत होती है।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि स्वार्थ और भयसे निर्मित सद्भाव क्षणिक होता है उसके परिणाम कटुक होते है।
जैन संत ने बताया कि कलयुग में संगठन से बड़ा और कोई धर्म नहीं है जिसका संगठन में विश्वास है वह अहिंसा वादी है।
मुनि कमलेश ने कहा की संतो मंदिर संस्कृति और देश की रक्षा के लिए हम सबको सैनिक की भांति काम करना है सभा में नगरपालिका के सभासद मौजूद थे संथारा व्रत धारी मयंक मुनि जी के सात उपवास पर आठवां दिन का संथारा चालू है।
मुनि कमलेश की प्रेरणा से साधु संतों के देवलोक गमन पर अंतिम संस्कार के लिए नगर पालिका की ओर से जमीन पर निर्माण कि समिति 15 सदस्य की बनाई । किशोर भाई कुवा डिया जगदीश भाई शाह के नेतृत्व में सकल जैन समाज ने राष्ट्र संत कमलमुनि से आगामी चातुर्मास की विनती की । उक्त जानकारी जैन दिवाकर राष्ट्रीय दिवाकर मंच सौराष्ट्र शाखा के पिंटू जैन संदीप जैन ने दी।

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