अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज की एक झलक पाने को उमड़ा भक्तों का सैलाब

सम्मेदशिखर जी/कोडरमा । 20 जून को तीर्थराज सम्मेदशिखर जी मे संघ सहित मधुबन स्थित सिद्धायतन प्रवेश के पश्चात अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखरजी में 20 वर्षो बाद भव्य मंगल प्रवेश रविवार को सैकड़ों भक्तों के साथ हुआ। मधुबन प्रवेश के दौरान अन्तर्मना आचार्य संघ के स्वागत में सकल जैन समाज मधुबन के भक्त सड़क पर तैनात थे। शाश्वत ट्रस्ट प्रकाश भवन से लेकर बीसपंथी कोठी तक सभी संस्था व समाज के श्रावक अपने अपने घर ओर संस्था के आगे रंगोली बनाकर अन्तर्मना के आने का राह निहार रहे थे। गुणायतन प्रणेता मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज अन्तर्मना आचार्य श्री का गुणायतन के मुख्य द्वार पर दो महान संतों के मिलन का दृश्य सैकड़ों श्रावकों का मन मोह ले गया। वहीं तेरा पंथी कोठी में विराजमान श्रमनाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महराज संसंघ अन्तर्मना आचार्य संघ का मिलन हुआ के साथ स्थाविरा सम्मेदशिखर जी मे विराजमान सबसे बुजुर्ग आचार्य श्री 108 सम्भव सागर जी महाराज ने भी अन्तर्मना आचार्य का मंगल आगमन किया इस अवसर पर तीन आचार्य मिलन देख कर सभी भक्त गदगद हो गए ऐसा दृश्य पूरे भारत मे देखने को नही मिलता है सभी भक्त यह दृश्य देखकर भाव बिभोर हो गए अन्तर्मना के मंगल प्रवेश की बेला पर शिखरजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के द्वारा अन्तर्मना संसंघ की आगवानी की गयी । मधुबन के समस्त जिन मंदिरों का दर्शन करते हुए अन्तर्मना आचार्य मधुबन स्थित मध्यलोक पहुंचे जहां पूर्व से सज धज कर तैयार प्रवचन मंच पर विराजमान हुवे जहाँ बिसपंथी कोठी के अध्यक्ष अजय जैन आरा, सुरेश झांझरी कोडरमा, प्रभात जैन गिरिडीह ने श्री श्री फलकर अन्तर्मना आचार्य ने श्री फल चढ़ाकर बिसपंथी कोठी में चातुर्मास करने का आग्रह किया मंगल प्रवेश में शामिल देश के कोने कोने से आये भक्तों को मंगल आशीर्वचन श्रवण करवाया और मंगल आशीर्वाद में विराजित मुनि श्री 108 पूण्य सागर जी महाराज ने कहा हम संत जिस जगह जाते है वहाँ एक अलग वात्सल्य ओर अपनापन झलकता है हम संत भक्तो से वोट,नोट, या चोट लेने नही आते हम तो भक्तो के खोट लेने आते है वही अन्तर्मना आचार्य श्री ने कहा हम यहा साधना ओर अपना कल्याण करने आये है ये सिद्ध भूमि त्याग और साधना की भूमि है यहाँ जो भी आता है साधना में रम जाता है हमारे दादा गुरु ने भी यहाँ साधना कर अपने जीवन को मोक्ष मार्ग में लगाया वही मुनि श्री पीयूष सागर जी महाराज ने कहा कि अन्तर्मना 20 साल पूर्व भी एक दिन में 8 वंदना की थी इस बार पहाड़ पर रहकर मोन साधना के साथ पहाड़ की कई वंदना कई तरह से करेंगे ओर इस बार 2 वर्षो तक 557 उपवास के साथ साधना करेंगे प्रवेश में सब के सब एक ही धुन में लीन थे बस अन्तर्मना आचार्य का एक झलक देखने को मिल जाय जय गुरुदेव के नारों से तीर्थनगरी मधुबन गुंजयमान हो उठा लगभग दो वर्ष होने को हैं सुन सान पड़ा तीर्थनगरी एक बार फिर से साधु संतों के आगमन से गुलजार हो गया। उक्क्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन ने दी।

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