संघर्ष का नाम जिंदगी है, सुख और दुख का चोली दामन का साथ है इसलिए सुख में फुले नहीं दुख में घबराए नहीं- क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज

जावरा। संघर्ष का नाम जिंदगी है। सुख और दुख का चोली दामन का साथ है इसलिए सुख में फुले नहीं दुख में घबराए नहीं। क्योंकि टेंशन से तन और मन दोनों को नुकसान पहुंचाता है। जीवन में दुख में से सुख खोजने की कला सीख लेना चाहिए। क्योंकि जो है वह कहीं नहीं जाने वाला है। जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। इस सिद्धांत को जीवन में आत्मसात करके चाहिए।
क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने दिगम्बर जैन मांगलिक भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आगे कहा कि राम में जैन दर्शन के 24 तीर्थंकर का दर्शन होता है । रा- से- ऋषभदेव -म- से महावीर। ऋषभदेव से महावीर की यात्रा का नाम राम है। राम कहो आराम मिलेगा ,सुबह नहीं तो शाम मिलेगा, खाने को पकबान मिलेगा ,राम कहो आराम मिलेगा। महापुरुषों के जीवन में भी दुख थे। जिन्हें उन्होंने मुस्कुराते हुए झेले। महावीर के कानोंमें उज्जैन में कील ठोकर गए थे ,जीसस को सूली पर लटकाया गया, कृष्ण की तीर लगने से मृत्यु हुई ,तब भी उन्होंने प्रतिकार नहीं किया ।अगर आप ईट का जवाब पत्थर से देकर अपने आपको तीर्थंकर और अवतारों का उपासक मानते हैं। तीर्थंकरों अवतारों का उपासक वह है जो कांटे देने वाले को फूल देता है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि दिन शुभ और अशुभ नहीं होता है। आदमी का मन शुभ और अशुभ होता है। मन अगर मंगल है तो अमावस्या का दिन भी पूर्णिमा की चांद बन जाएगा ।जैसे तीर्थंकर महावीर ने अमावस्या के दिन निर्वाण को प्राप्त करके पूर्णिमा का बना दिया। जीवन भर धन-धन चिलाने वाला मृत्यु के समय निर्धन हो जाता है। रात इस तरह बिताओ सुबह किसी को चेहरा दिखाने में शर्म ना आए। दिन इस तरह विताओ कि रात चैन की नींद सो सको, जवानी इस तरह जियो कि बुढ़ापे में किसी के सामने हाथ ना फैलाना पड़े। मुनि श्री प्रतीकसागर जी महाराज ने कहा कि धर्म वह नहीं होता जो दुसरे धर्मात्मा की निन्दा कर्ता हो धर्मात्मा तो वह है निन्दा करने बाले के प्रति वत्सल भाव रखकर उस के कल्याण के लिए भगवान से प्रार्थना करता हो और उस के दुख के समय सब से पहले खड़ा रहता हो । वस्त्र बदलना तो बहुत आसान है मगर अपने दुश्मन को क्षमा कर मुस्कुरा कर देखना बहुत मुश्किल है। हुमड दीगम्बर जैन समाज अध्यक्ष रीतेश जैन ने बताया की 7 जुलाई को प्रातः 9 बजे मुनि श्री प्रतीकसागर जी महाराज के मंगल प्रवचन होगे।

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