मेवाड़ सौरभ उपप्रवर्तिनी मालवकिर्ती पू.श्री किर्तीसुधाजी म.सा आदि ठाणा 5 का चातुर्मास रतलाम में, मंगलप्रवेश 13 जुलाई मंगलवार को

रतलाम । श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक रतलाम में इस वर्ष राष्ट्रसंत आचार्य भगवन पू.श्री आनन्दऋिषीजी म.सा. के मुखारविंद से ठीक 50 वर्ष पूर्व दीक्षित श्रमण संघीय आचार्य भगवन ध्यानयोगी डा शिवमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी, मालव ज्योति गुरूणी मैय्या पू.श्री वल्लभकुंवरजी म.सा. की प्रथम सुशिष्या जिनशासन प्रभाविका, ज्ञानगंगोत्री, मेवाड़ सौरभ उपप्रवर्तिनी मालवकिर्ती पू.श्री किर्तीसुधाजी म.सा आदि ठाणा 5 का चातुर्मास होने जा रहा है।
संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया ने बताया की रतलाम श्रीसंघ का यह सौभाग्य है पूज्य महासती कीर्तिसुधा के क्रियानिष्ठ संयमी जीवन के संयम स्वर्ण जयंति वर्ष का वर्षावास हेतु स्वर्ण नगरी रत्नपुरी (रतलाम म.प्र.) को प्राप्त हुआ ।
50वाँ वर्षगाँठ मिलना अपने आप में सुखद संयोग ही है क्योंकि यह चातुर्मास पिछले वर्ष ही निर्धारित था लेकिन कोरोना की वजह से हो नही पाया। और इस वर्ष यह सुअवसर प्राप्त हो गया ।
महामंत्री जयंतीलाल डाँगी एंव कोषाध्यक्ष अमृत कटारिया ने बताया की पूज्या श्री कीर्तिसुधा जी मसा का संयम जीवन बहुत ही उत्कृष्ट है इतनी उम्र में भी वे अपना सामान स्वंय उठाते है, साथ में कभी भी सेवक सेविका नही रखते है, व्हील चेयर का उपयोग कभी नही किया, माइक में प्रवचन नही देते है। और 5 सतियों में 2 के उपवास से तथा 3 के एकासन से वर्षीतप चल रहे है। आपका विशेष जोर केवल त्याग तपस्या पर रहता है। जँहा भी आप चातुर्मास करते है वँहा छोटी बड़ी तपस्या की झड़ी लग जाती है।
दिनांक 10-11-12 को आप महामंगलकारी भक्ताम्भर सम्पूट का पाठ करेंगे और दिनांक 13 जुलाई मंगलवार को आपका मंगलप्रवेश जैन दिवाकर स्मारक से प्रातः 7.15 बजे नीमचौक स्थानक पर होगा । संघ के वरिष्ठ इन्दरमल जैन, महेंद्र बोथरा, मणीलाल कटारिया, ललित पटवा, प्रेमकुमार मोगरा ने बताया की प्रवेश और चातुर्मास के दौरान प्रशासन द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइन का पूर्णतः पालन किया जाएगा।
युवा मंडल अध्यक्ष रितेश मूणत, महिला मंडल अध्यक्ष पिस्ता कटारिया, और बहू मण्डल अध्यक्ष मीना गाँधी ने बताया की महासती जी ने प्रवेश वाले दिन श्रीसंघ के सदस्यों से अधिक से अधिक संख्या में आयम्बिल करने का आव्हान किया है इसलिये 13 तारीख को आयम्बिल व्रत के रूप में महासतीजी आध्यात्मिक आगवानी करे।

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