इतिहास का निर्माण त्याग तपस्या और बलिदान की बिना संभव नहीं हो सकता – राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

गोंडल शहर आगमन पर सकल जैन समाज सहित धार्मिक सामाजिक राजनीतिक पत्रकार जगत ने स्वागत किया

गोंडल डूंगर सिंह जैन उपाश्रय। इतिहास का निर्माण त्याग तपस्या और बलिदान की बिना संभव नहीं हो सकता वह महान आत्मा मरकर भी अमर हो जाती है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश में गोंडल संप्रदाय संस्थापक डूंगर जी स्वामी की तपोभूमि गोंडल में संबोधित करते कहा कि इतिहास की शिक्षाएं हजारों वर्षों तक आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि इतिहास की रक्षा करना धर्म संस्कृति और भगवान की रक्षा करने के समान है। मानवता के निर्माण में ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण योगदान है।
मुनि कमलेश ने बताया कि जो मान अपमान और मरने की परवाह नहीं करता है सिद्धांतों से समझौता नहीं करता है वही महापुरुष बनता है । राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ करना महापुरुषों के साथ धोखा करने के समान है इतिहास को सुरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी मांग है जैन संतों ने दुख के साथ कहा कि वर्तमान में इतिहास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है विश्व की संपूर्ण संपत्ति दान देकर भी इतिहास का निर्माण नहीं किया जा सकता।गोंडल शहर आगमन पर सकल जैन समाज सहित धार्मिक सामाजिक राजनीतिक पत्रकार जगत ने स्वागत किया युवा संत रत्न श्री पारस मुनि जी ने अगला चातुर्मास गोंडल में करने की विनती की जिसका अनुमोदन गोंडल संप्रदाय के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण भाई कोठारी ने जोरदार ढंग से प्रस्तुत की अशोक भाई कोठारी दिलीप भाई पारेख विचार व्यक्त किए । डूंगर गुरु महिला मंडल गुरु भक्ति का गीत प्रस्तुत किया । घनश्याम मुनि गौतम मुनि ने मंगलाचरण किया।

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