रतलाम । डाॅ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता और अखण्डता अक्षुण बनाये रखने के लिए अपना जीवन होम कर दिया। देश मे दो प्रधान, दो निशान और दो विधान के सहारे कांग्रेस सरकार काश्मीर को भारत से अलग करने का षडयंत्र आजादी के बाद से लगातार करती रही। कांग्रेस के इसी षडयंत्र के खिलाफ डाॅ.मुखर्जी ने लगातार संघर्ष किया।
उक्त विचार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत जी ने ’’ डाॅ.मुखर्जी-विचार एवं कार्य ’’ विषय पर आयोजित जिला ई-चिंतन शिविर मे व्यक्त किये। श्री भगत ने कहा कि डाॅ.मुखर्जी मात्र 23 साल की उम्र में कलकत्ता विश्व विद्यालय की सिडिकेट मे चुने गये। उन्होने इंग्लेड मे कानून की शिक्षा गृहण की और मात्र 35 वर्ष की आयु मे कलकत्ताविश्व विद्यालय के कुलपति चुने गये। डाॅ.मुखर्जी ने दो बार कुलपति पद की जिम्मेदारी निर्वहन किया।
भाजपा नेता ने कहा कि 1947 की आजाद भारत की प्रथम सरकार में महात्मा गांधी के कहने पर नेहरू जी ने डाॅ.मुखर्जी को अपने मंत्री मंडल मे शामिल किया था हलाकि वीर सावरकर जी के आग्रह के बावजूद डाॅ.मुखर्जी सरकार मे शामिल नही होना चाहते थे क्योकि डाॅ.मुखर्जी का एक मात्र लक्ष्य देश मे हिन्दुओं पर किये जा रहे अत्याचार के विरूद्ध संघर्ष करना था। जब पुरे बंगाल को विभाजन के समय पाकिस्तान में शामिल किये जाने का षडयंत्र नेहरू द्वारा किया जा रहा था तब डाॅ.मुखर्जी ने बंगाल के विभाजन के लिए निर्णायक संघर्ष किया। डाॅ.मुखर्जी के इस संघर्ष मे कई राष्ट्रवादी साथ खडे़ नजर आयें। परिणाम ये हुआ कि बंगाल का विभाजन करना पड़ा तथा मुस्लिम बाहुल्य बंगाल का हिस्सा पाकिस्तान को दिया गया एवं हिन्दु बाहुल्य बंगाल के हिस्से को भारत के साथ रखा गया।
जब 1950 मे बांग्लादेश (तब का पाकिस्तान) मे हिन्दुओं पर एक बार फिर से अत्याचार किये जाने लगे तब डाॅ.मुखर्जी ने मंत्री पद त्यागते हुए तब के पाकिस्तान मे रह रहे हिन्दुओं पर अत्याचार रोकने के लिए लड़ाई लड़ी।
डाॅ.मुखर्जी ने भारत को तीन बड़ी उपलब्धियां दिलवाई जिनमे बंगाल को विभाजित कर पुरे बंगाल को पाकिस्तान मे जाने से बचाया, काश्मीर के लिए दो प्रधान, दो निशान और दो विधान के खिलाफ देश मे अलख जगाया तथा जनसंघ जैसे राष्ट्रवादी राजनेतिक दल की स्थापना की। काश्मीर मे उन्हे देश की एकता के लिए लड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया गया तथा उन्हे सरकारी अस्पताल मे बिना किसी बिमारी के भर्ती कर दिया गया जहां संधिग्ध अवस्था मे डाॅ.मुखर्जी की मात्र 52 वर्ष आयु मे शहादत हो गई। देश ने डाॅ.मुखर्जी की मृत्यु की जांच किये जाने की मांग की किन्तु नेहरू ने जांच करवाने से इनकार कर दिया।
ई-चिंतन शिविर मे भाजपा जिलाध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह लुनेरा, रतलाम ग्रामीण विधायक श्री दिलीप मकवाना, ई-चिंतन जिला प्रभारी श्री निर्मल कटारिया, श्री अशोक पोरवाल, श्री सोमेश पालीवाल, श्री अरूण राव, श्री करन वशिष्ठ , श्री योगेश राठोड़, श्री धर्मेन्द्र सिंह देवड़ा, श्री सुरेश सिंग्गाड़, श्रीमति अनिता कटारा, श्री आकाश खड़के, श्री शुभम गुर्जर, श्री इब्राहीम शेरानी, श्री कृष्ण कुमार सोनी, श्री नीलेश गांधी, श्री करण धीर बड़गोत्या, श्री आनन्दीलाल राठोड़, श्री श्याम धाकड़, श्री अम्बाराम गरवाल, श्री हेमंत राहोरी, श्री कमल सिलावट, श्री विनोद यादव, श्री राकेश परमार, श्री अविनाश राव, श्री दिनेश धाकड़, श्री गोविंद परिहार, श्री बद्रीलाल डोडिया, श्री गणेश मुनिया, श्री राजेन्द्र जाट, श्री बालकृष्ण व्यास, श्री नारू डामर, श्री कैलाश वसुनिया, श्री शक्तिसिंह चैहान, श्री नरेन्द्र वसुनिया, श्री सुरेन्द्र सिंह भाटी, श्रीमति पुजा शर्मा, श्री दिनेश गुर्जर, श्री ईश्वरलाल गुर्जर, श्री अम्बिका पाटीदार, श्रीमति ललिता पंवार, श्री अनुकुल सोनी, श्रीमति उषा पाटीदार भी उपस्थित थी।
ई-चिंतन बैठक का संचालन प्रदेश भाजपा महामंत्री श्री भगवानदास सबनानी जी ने तथा आभारप्रदर्शन ई-चिंतन बैठक के प्रदेश प्रभारी श्री विजय दुबे जी ने व्यक्त किया।