
रतलाम,12 जुलाई| धर्मधरा रतलाम के लाल, परम पूज्य श्री अजित मुनिजी महाराज साहब का बीती देर रात्रि कालधर्म हो गया। आचार्य गुरु नानेश ( नानागुरु) के परम शिष्य सरल सहज स्वभाव के धनी मुनिश्री विगत 4 वर्ष से रतलाम के संतनगर त्रिवेणी रोड स्थित जैन तपोवन स्थानक पर स्थिरवास में थे ।
मुनिश्री ने जोधपुर में वर्ष 1977 में आचार्य नानेश के सानिध्य में 21 वर्ष की आयु में जैन मुनि के रुप में दीक्षा ग्रहण की थी। नगर के प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसायी दाड़मचंद चत्तर उनके सांसारिक पिता थे। उन्हें पूज्य माता रोशनबाई चत्तर ने सहर्ष दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की थी।
सोमवार को प्रातः काल मुनिश्री का ह्रदयाघात से देवलोक गमन हो गया। उनकी निर्वाण यात्रा 10:30 बजे संत नगर त्रिवेणी रोड स्थित जैन तपोवन उपाश्रय से निकली। त्रिवेणी मुक्ति धाम पर अंतिम संस्कार किया गया। मुनिश्री के अनायास कालधर्म की खबर से नगर में शौक की लहर व्याप्त हो गई।