साल भर खूब खाया इडली डोसा अब कर लो पोसा, साल भर करी खूब बकवास अब कर लो उपवास, साल भर खूब लिया ब्याज अब कर लो कुछ त्याग: पूज्याश्री आराधनाश्रीजी मसा
रतलाम । संसार के इस भीषण संग्राम में मन को माथेरन, दिल को दार्जलिंग जैसे सकून देने वाला हिल स्टेशन बनाना है । चातुर्मास आदि व्याधि उपाधि से संतप्त इस संसार को शांति प्रदान करने के लिये आता है। भाग्यशाली है रतलामवासी जिन्हें चातुर्मास में सन्त सतियों का सानिध्य मिला। चातुर्मास में पानी और वाणी की बरसात होती है । पानी तन की प्यास बुझाता है और वाणी मन की प्यास बुझाती है।
जिनवाणी को सुनकर कई पापी आत्माएं इस भव सागर से तीर गई फिर हम तो इतने बड़े पापी भी नही है । लेकिन केवल सुनने से काम नही होगा, सुनकर अंतर्मन में उतारना होगा, अमल में भी लाना होगा, आज के दिन को शाश्वत दिन कहा गया है जो भी आरा समाप्त होता है या प्रारम्भ होता है वो असाढ़ी पूनम से ही शुरू और अंत होता है।
ऐसी साधना करो की सारी जिंदगी का सार निकल जाए, इस पराक्रम को जाग्रत करने के लिए रसेन्द्रीय को, मन को और इन्द्रीयों को नियंत्रण में करना होगा।
चातुर्मास जीव हिंसा से बचने का अवसर है, श्रावक 8 महीने संसार में उलझे रहते है इसलिए इन 4 महीनों में जितना धर्म ध्यान कर सके करना चाहिए। नेमीनाथ भगवान की यह बात सुनकर तीन खण्ड के अधिपति श्री कृष्ण में चातुर्मास में द्वारिका छोड़ कर बाहर नही जाने का संकल्प लिया। हेमचंद्राचार्य की वाणी सुनकर राजा कुमारपाल ने चातुर्मास में नगर से बाहर नही निकलने का संकल्प लिया, आज के समय में भी कई ऐसे श्रावक है जिनका लम्बा चौड़ा कामकाज है लेकिन वो चातुर्मास में धर्म आराधना में समय व्यतीत करते है ।
भाग्य में जो लिखा है उसे कोई छीन नही सकता है और समय से पहले कुछ मिल नही सकता है। जब घर में शुभ कार्य होता है मंडप लगाते है । मंडप चार स्तम्भ पर खड़ा होता है । इस चातुर्मास के लिये भी हमें चार स्तम्भ खड़े करना है । जिसमें पहला स्तम्भ है ब्रह्मचर्य व्रत का पालन, ब्रह्मचर्य का पालन करने से 9लाख सन्नी जीवों को अभयदान मिलता है। चातुर्मास काल में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिये नही हो सके तो कम से कम 2 माह सावन भादौ में तो पालन करना ही चाहिए ।
दूसरा स्तम्भ है रात्रि भोजन का त्याग । रात्रि भोजन पाप नही महापाप है ये नरक की और ले जाने वाला नेशनल हाईवे नम्बर वन है। 96 भव तक लगातार मछली मारने से जो पाप लगता है, उतना पाप एक सरोवर को सुखाने से लगता है, 108 भव तक सरोवर को सुखाने से जितना पाप लगता है उतना पाप एक बार जंगल में दावानल लगाने से या जंगल को काटने से लगता है, 108 भव तक दावानल का जितना पाप लगता है उतना पाप एक बार कुव्यापार करने से लगता है, 144 भव कुव्यापार करने से जितना पाप लगता है उतना पाप एक बार कुकर्म करने से लगता है, 144 भव कुकर्म करने में जितना पाप लगता है उतना 1 बार किसी पर झूठा कलंक लगाने से लगता है, 151 भव तक झूठा कलंक लगाने में जितना पाप लगता है उतना एक भव में पर स्त्री गमन या पर पुरूष गमन में लगता है। 99 भव में पर स्त्री/पुरुष गमन में जितना पाप लगता है उतना पाप एक भव में रात्रि भोजन करने में लगता है।
पूज्य प्रवर्तक रमेश मुनिजी के गुरुदेव पूज्य श्री सूर्यमुनि जी ने रात्रि भोजन सम्बन्धी यह पाप जैन रामायण में बताया है। परिस्थिति वश रात्रि भोजन करना पड़े वँहा तक तो ठीक है लेकिन जानबूझ कर रात्रि भोजन करना महापाप का कारण है। 1 साल रात्रि भोजन का त्याग करने पर 6 माह की तपस्या का लाभ मिलता है ।
चातुर्मास का तीसरा स्तम्भ है कन्दमूल (जमीकंद) का सम्पूर्ण त्याग । जमीकंद में सुई की एक नोंक बराबर जगह में अनन्ता अनन्त जीव होते है । 10 ट्रक में जितनी हरी सब्जी होती है उसमें जितने जीव होते है उससे ज्यादा जीव जमीकंद के एक छोटे से टुकड़े में होते है ।
चातुर्मास का चौथा स्तम्भ है श्रृंगार सौंदर्य प्रसाधन का त्याग। महापाप से बनती है सौंदर्य सामग्री लिपिस्टिक, क्रीम पाउडर, रेशम की साड़ी, चमड़े के बेल्ट, जूते, पर्स बेजुबान प्राणियों को असहनीय वेदना देकर इन सौंदर्य सामग्री का निर्माण किया जाता है।
चार स्तम्भ के बाद मण्डप में छत भी होती है अब यह छत कैसी होना चाहिए यह अगले संदेश में बताया जाएगा। यह धर्म संदेश महासती जिनशासन प्रभाविका मेवाड़ गौरव उप प्रवर्तनी बाल ब्रह्मचारी मालवकीर्ति पूज्या श्री कीर्तिसुधाजी ने प्रदान किया। पूज्या श्री आराधनाश्रीजी ने अपने धर्म सन्देश में कहा की जैसे चातक पक्षी चन्द्रमा की राह देखता है वैसे ही सच्चा श्रावक चातुर्मास की राह देखता है ।
किसान सोचता है की चातुर्मास अच्छा नही हुआ तो साल बिगड़ जाएगा, वैसे ही श्रावक को ये सोचना चाहिए की अगर चातुर्मास में भी धर्म ध्यान नही किया तो जीवन बिगड़ जाएगा।
नीमचौक स्थानक की गुडविल सुनकर हम 5 बंजारे अपने गुरुजी का माल बेचने आपके नगर में आए है, अब देखना है की आप कितना माल हमसे लेते हो, हम परमात्मा के पोस्टमैन बनकर आए है, हमारा सारा माल फ्री ऑफ चार्ज है। सामान्य रूप से 12 में से 4 गए तो 8 बचते है, लेकिन श्रावक यदि चातुर्मास के 4 माह धर्म आराधना न करे तो उसका पूरा वर्ष शून्य हो जाता है ।
बेटा या बेटी युवा होते है तो माँ बाप उनकी शादी के सपने देखते है पोते पोती के सपने देखते है लेकिन कोई भी ये सपना नही देखता है कि मेरी सन्तान सन्त सती बने, ये सपना देखो और उसे पूरा करने का पुरूषार्थ करो। लड़का लड़की देखने जाता है लड़की से पूछता है की तुम्हे कौन सी ऋतु पसन्द है मार्डन लड़की बोलती है की गर्मी का मौसम सबसे बढ़िया होता है क्योंकि इस मौसम में छोटे छोटे कपड़े पहन सकते है, ठंडी ठंडी चीजे खाने को मिलती है, दूसरी लड़की बोलती है ठंड का मौसम अच्छा होता है सेहत बनती है बढ़िया बढ़िया खाने को मिलता है, दिन छोटे होते है राते बड़ी होती है बहुत आराम करने को मिलता है। तीसरी लड़की जो ज्यादा सुंदर नही थी उसने कहा सबसे अच्छी ऋतु चातुर्मास की होती है जिसमें धर्म ध्यान तप त्याग तपस्या करने का अवसर मिलता है, वो लड़का उस संस्कारी लड़की को पसंद कर लेता है।
अगर धर्म की सर्च लाइट से संस्कार को प्रकाशित नही किया तो नरक में नाईट बितानी पड़ेगी। सद्गुणों का संचय करने वाला सिलेक्टर, धर्म क्रिया द्वारा पूण्य का कलेक्टर, कर्म शत्रु का सामना करने वाला धर्म का इंस्पेक्टर, माया ममता रूपी परदों को तोड़ने वाला ट्रेक्टर, धर्म आराधना की कम्पनी का बनना है डायरेक्टर, जिनशासन का बनना है मिनिस्टर, भव रोग को मिटाने वाला बनना है डाक्टर, सम्यक ज्ञान चारित्र के लिये मन को बनाना है लाइटर, कर्म शत्रु को पराजित करने वाला बनना है फाइटर । मोक्ष मंदिर का स्टार बनना है । अब तक के जीवन में जो काली नाईट है उसे धर्म रूपी प्रकाश से प्रकाशमान करना है।