निर्मल भाव में जब धर्म के नाम पर भी राग, द्वेष, रुपि, भेदभाव के जहर का समावेश हो जाता है तो आत्मा का पतन निश्चित है – राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

अहमदाबाद ओढव महावीर भवन 10 जनवरी 2021 । निर्मल भाव में जब धर्म के नाम पर भी राग द्वेष रुपि भेदभाव के जहर का समावेश हो जाता है तो आत्मा का पतन निश्चित है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि विश्व के सभी धर्मों का मुख्य लक्ष्य भावों में निर्मलता और पवित्रता लाने का है । उन्होंने कहा कि हर धार्मिक क्रिया के पीछे भाव शून्य है वह साधना भी मुर्दे को शृंगार कराने के समान है।
मुनि कमलेश के बताया कि दुश्मन तो तन और धन का ही नुकसान करता है लेकिन दुर्भावना आत्मा के सद्ग विचारों का नाश कर देती है। जैन संत ने कहा कि निर्मल भाव से भक्ति के माध्यम से परमात्मा तक को वश में किया जा सकता है गुजराती स्थानकवासी महा साध्वी जी एवं मूर्तिपूजक संतो ने मुनि कमलेश का अभिनंदन किया।
राष्ट्रसंत ने बताया कि धर्म का संबंध जाति कुल पंथ गरीब अमीर ऊंच-नीच नारी पुरुष ना होकर मात्र भा व को प्राथमिकता दी गई है अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली शाखा अहमदाबाद की ओर से पक्षी बचाओ अभियान के अन्तर्गत10 जनवरी से 16 जनवरी तक घायल पक्षों की सेवा के लिए शिविर का आयोजन किया जा रहा है ।

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