मकर संक्रांति दान और मन्त्र का महत्व

ज्योतिषाचार्य मंजुला जैन उज्जैन Mo.9926506468

14/01/2022 शुक्रवार तिथि द्वादशी को दोपहर 02:28 मिनिट पर सूर्य देव – शनिदेव की मकर राशि में उत्तराषाढा नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे है। संक्रांति का पुण्यकाल भी शुक्रवार को ही माना जावेगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 21 वाँ अजेय नक्षत्र है। इसका स्वामी सूर्य है।
सूर्यदेव का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को संक्रांति कहते हैं ।
1 वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांति होती है। जिसमें मेष तुला कर्क मकर संक्रांति प्रमुख है मकर संक्रांति के सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तरायण होने लगते हैं इस दिन से ही दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से देवताओं के दिन आरंभ होते हैं और कर्क संक्रांति से देवताओं की रात आरंभ होती है अर्थात देवताओं की 6 माह का दिन और छह माह की रात होती है वही मनुष्य का 1 वर्ष होता है वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को आत्मा का कारक, तारों का जनक और जन्म कुंडली में पिता का प्रतिनिधित्व करता है ।
सूर्य के कारण पिता से संतान का संबंध मधुर व कटु बनता है। मान्यता है कि सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश शुभ माना जाता है । मकर राशि शनि का प्रतीक है । और शनि देव सूर्य पुत्र हैं ।
इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। इसलिए यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।
14 जनवरी 2022 को सूर्य और शनि देव दोनों ही मकर राशि में उपस्थित है। सूर्य देव उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे जो सूर्य का ही नक्षत्र होगा। इस कारण सूर्य देव के मंत्र जाप और दान का प्रभाव अधिक बलशाली रहेगा ।
शनि की साढ़ेसाती व शनि प्रभावी जातकों को भी विशेष राहत वह सफलता मिलेगी ।
दान – अपने सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार करें।
दान की वस्तुएं -मसूर दाल, तिल से बनी सभी पदार्थ ,मूंग की दाल की खिचड़ी, ऊनी वस्त्र, भोजन,गुड़, गाय की सेवा ,जरूरतमंद की सेवा, करें।
सुपात्र दान देवें।
मंत्र जाप- पूर्व दिशा में जल में रोली, अक्षत, लाल फूल डालकर अर्ध्य देवें।
(1) ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।
(2) ॐ ह्रीं अ सि आ उ सा सिद्धाणं नमः। मन्त्र की 5 माला फेरे।
सूर्य संक्रांति का जैन धर्म मे विशेष महत्व
जैन धर्म में सूर्य संक्रांति का दिन गुरु दर्शन करने , गुरु भगवंतो के श्री मुख से तिथि, वार, नक्षत्र ,करण, और योग*- पंचदेवता का श्रवण करने से और महा मांगलिक श्रवण करने से सुख संपत्ति, आयुष की अभिवृद्धि ,पाप का निवारण ,कार्य में सफलता , धनाढ्य होकर रोग से निवृत्ति हो जाती है।

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