जैन जगत के ज़रूरी अधिकार और जैन मंदिर व तीर्थ कैसे बच पाएँगे…..?

सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.
कवि,लेखक,पत्रकार,क़लमकार,चिंतक

अगर केसरियाजी की तरह ही जब सम्मेद शिखरजी भी हाथ से जाएगा और गिरनार की तर्ज़ पर यह भी हिन्दू तीर्थ बन जाएगा और जैन धर्म को हिन्दू धर्म का दास बनाना चाहते हों तो फिर जैन धर्म का अस्तित्व,अस्मिता और अस्मत कैसे बच पाएँगे ?
देश में पिछले तीस वर्षों में आधा दर्जन राज्यों में तीन हज़ार जैन मंदिर परिसरों पर कापरड़ा से लेकर बद्रीनाथ के आदिनाथ तीर्थ मन्दिरों की तरह ज़बरिया क़ब्ज़े कर वे शिव मंदिर बन गए हैं तो फिर बाक़ी देश भर के सभी जैन मंदिर दादागिरी से शिव मन्दिर बनने से कैसे बच पाएँगे ?
दूसरे धर्मों के समाज व वर्ग जो हमसे भी संख्या में कम व छोटे हैं और बिखरे से भी लगते हैं,वे भी अपने अस्तित्व को लेकर सरकारों को झूखा
सकते हैं तो हम उनसे कई गुणा अधिक होते हुए भी इस कदर निढाल व हार मानकर बैठ जाएँगे तो फिर जैन जगत व जिनत्व के अस्तित्व व ज़मीर कैसे बच पाएँगे, घर घर से आवाज़ उठानी ही होगी,हर पन्थ व सम्प्रदाय से जिन धर्म व धर्म स्थलों की सुरक्षा का शंखनाद गुंजाना होगा,दिगम्बर व श्वेताम्बर के झगड़ों को मिटाना होगा और राजनीति में भी जैनों ने आँख दिखाने का सुर व राग नही पकड़ा तो फिर जिनशासन के हित जैन जगत के ज़रूरी अधिकार व जैन मंदिर व तीर्थ कैसे बच पाएँगे..?

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