आमजन के स्वास्थ्य के दृष्टिगत खाद्य एवं औषधि निरीक्षक मिलावटी वस्तुओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करें

कलेक्टर श्री पुरुषोत्तम ने समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

रतलाम । समय सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक में विगत बैठकों की भांति इस बार भी कलेक्टर श्री कुमार पुरुषोत्तम द्वारा खाद्य एवं औषधि विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक श्री जमरा से उनके द्वारा मिलावटी वस्तुओं के विरुद्ध की गई कार्यवाही के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। श्री जमरा द्वारा दिए गए उत्तर से असंतुष्ट कलेक्टर द्वारा मावा, दूध, घी इत्यादि खाद्य वस्तुओं में मिलावट के नमूनों ज्यादा से ज्यादा लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने हेतु निर्देशित किया। कलेक्टर ने कहा कि आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में सम्मिलित है। बैठक में अपर कलेक्टर श्री एम.एल. आर्य, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती जमुना भिड़े, एसडीएम श्री राजेश शुक्ला, संयुक्त कलेक्टर श्री अभिषेक गहलोत, एसडीएम सुश्री कृतिका भीमावद, डीएफओ श्री डी.एस. डूडवे, निगमायुक्त श्री सोमनाथ झारिया, सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर नानावरे, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री पी.के.गोगादे, जिला योजना अधिकारी श्री बी.के. पाटीदार, जिला आपूर्ति अधिकारी श्री एस.एच. चौधरी आदि उपस्थित थे।
बैठक में कलेक्टर ने सभी एसडीएम निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की परीक्षाओं के दृष्टिगत कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। रात्रि 10:00 बजे से लेकर सुबह 6:00 बजे तक के लिए सभी डीजे, बैंड इत्यादि ध्वनि विस्तारक प्रतिबंधित किए जाएं ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आए। आंगनबाड़ियों में बच्चों को उचित शिक्षा-दीक्षा तथा इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धता के दृष्टिगत अधिकारियों को सौंपी गई। आंगनबाड़ियों के संबंध में कलेक्टर द्वारा जानकारी दी गई। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वह आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों की पढ़ाई से लेकर तमाम व्यवस्थाओं को देख रहे हैं और जो जरूरी सुधार हैं उनका कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी श्रीमती नीरजा श्रीवास्तव, जिला खनिज अधिकारी सुश्री आकांक्षा पटेल द्वारा आंगनवाड़ी में पहुंचकर किए गए निरीक्षण तथा अवलोकन की जानकारी कलेक्टर को दी गई।
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि वे मात्र निरीक्षण तक सीमित नहीं रही बल्कि आंगनवाड़ी के बच्चों से आत्मीयता रखते हुए कार्य करें। एसडीएम सुश्री कृतिका भीमावद ने भी आंगनवाड़ी निरीक्षण की जानकारी दी। कलेक्टर ने कहा कि आंगनबाड़ियों में अधोसंरचना, आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिला खनिज फंड से कार्य करवाए जा सकेंगे। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी महीने में दो या तीन बार अपनी आंगनवाड़ी में अवश्य पहुंचे। किसी भी समस्या के संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास श्री रजनीश सिन्हा से संपर्क करें। आंगनवाड़ी में बच्चों के हाथ धोकर भोजन लेने, बर्तनों की उपलब्धता, हैंडवाश सिस्टम, उचित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही श्री सिन्हा को निर्देशित किया कि आंगनवाड़ियों की रैंकिंग भी की जाना है।
बैठक में तहसीलदार श्री गोपाल सोनी ने बताया कि उनकी तहसील में हर सप्ताह 15 से 20 आवेदन विमुक्त, घुमक्कड़, अर्धघुमक्कड़ जातियों के प्रमाण पत्र बनाने के लिए आते हैं। कलेक्टर ने इस संबंध में समुचित व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारी सुश्री रश्मि तिवारी को भी आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया। जिले में पशु चिकित्सा विभाग तथा मत्स्य विभाग द्वारा केसीसी बनाए जा रहे हैं। पशुपालक तथा मत्स्य कृषकों के केसीसी बन जाने पर उनको आवश्यक पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, साथ ही आर्थिक समृद्धि भी हासिल होगी। इस दृष्टि से मत्स्य विभाग को 2000 केसीसी बनाने का लक्ष्य है। अब तक 735 मत्स्य कृषको के केसीसी बनाए जा चुके है। पशु चिकित्सा विभाग के लक्ष्य के तहत 9000 केसीसी स्वीकृत किए जा चुके हैं। बीते एक सप्ताह में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा 1000 पशुपालक कृषकों के केसीसी बनवाए गए।
इसी प्रकार उद्यानिकी विभाग के अधिकारी श्री कनेल ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत चयनित फसल लहसुन की प्रसंस्करण इकाइयों के 10 प्रकरण बैंकों द्वारा स्वीकृत किए जाने वाले हैं। अब तक 4 प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। कलेक्टर ने आयुष्मान कार्ड निर्माण तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों के निराकरण की भी समीक्षा की। जनसुनवाई व्यवस्था के संबंध में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई कार्यक्रम की विश्वसनीयता बरकरार रहे। यदि जनपद क्षेत्रों से शिकायतें आती हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि संबंधित जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा कार्य नहीं किया जा रहा है।
बैठक में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा जानकारी दी गई कि जिले की सभी पुरानी जल संवर्धन की 686 योजनाओं में से 48 योजनाओं की तकनीकी स्वीकृति के प्राक्कलन उपयंत्रियों से प्राप्त होना शेष है। इस संबंध में कलेक्टर ने निर्देशित किया कि शेष प्राक्कलन तत्काल प्राप्त कर स्वीकृत सभी जल संवर्धन योजनाओं के जीर्णोद्धार कार्य को 15 अप्रैल तक पूर्ण कराया जाए।