स्वतंत्रता तब से मानी जाती है, जब हमसे जुड़ी हर बात स्व-निर्णय के आधार पर लागू हो – जे नंद कुमार

स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला समिति द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला का समापन

रतलाम । स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला समिति द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के रूप में प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे.नंद कुमार उपस्थित रहे। जिन्होंने स्वराज्य से स्वतंत्रता की ओर विषय पर व्याख्यान दिया । नगर के प्रसिद्ध डॉक्टर जयंत सुभेदार मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रहे । मुख्य वक्ता जे. नंद कुमार ने स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्षों का विस्तृत विवरण दिया ।आपने कहा की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष अट्ठारह सौ सत्तावन में नहीं उससे भी कई वर्षों पहले प्रारंभ हो चुका था एवं यह जो संघर्ष हुआ वह राष्ट्र के स्व-आधारित विचार से प्रेरित रहा है।उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता तब से मानी जाती है, जब हमसे जुड़ी हर बात स्व-निर्णय के आधार पर लागू हो जैसे रहन सहन, खान पान, शिक्षा आदी। स्व सत्ता के लिए शिवाजी द्वारा हिन्दवी स्वराज्य की कल्पना, लोकमान्य तिलक द्वारा स्वराज शब्द का प्रयोग यही सब दर्शाता है। उन्होंने कहा स्वतंत्रता संग्राम के गलत नैरेटिव को देश मे प्रचलित किया गया।यह संग्राम देशव्यापी, सभी वर्गों, जातियों, क्षेत्रों में लड़ा गया। यह सिर्फ पॉलिटिकल आंदोलन ना होकर कला,धर्म, कृषि, उद्योग, फ़िल्म, शिक्षा, संस्कृति सभी क्षेत्रों में स्व आधारित विचार पर लड़ा गया।
1885 में कांग्रेस की स्थापना को अंग्रेजों द्वारा सेफ्टी वाल्व की संज्ञा दी गयी थी, जिससे 1905 के बंग भंग षडयंत्र की विफलता के बावजूद अंग्रेज पूरे देश का विभाजन करने में सफल हो गए
।मुख्य अतिथि डॉ सुभेदार ने अपने परिवार के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को उल्लेखित करते हुए बताया कि उनके दादा जेल गए,दादी और पिताजी भी सेनानी रहे , पर उनके दिए संस्कार ऐसे थे कि उनके परिवार ने कभी भी सेनानियों को दी गई शासकीय सेवाओं का उपयोग नहीं किया ।कार्यक्रम का संचालन वैभव उपाध्याय ने किया । अतिथि परिचय समिति के सचिव डॉक्टर हितेश पाठक ने कराया। सरस्वती शिशु मंदिर के छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना का गायन किया गया एवं कार्यक्रम के अंत में वंदे मातरम गायन किया गया। आभार समिति अध्यक्ष विम्पी छाबड़ा ने दिया।बड़ी संख्या में रतलाम जिले के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे,जिनमें युवाओं की बड़ी संख्या रही।

रतलाम । स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला समिति द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के रूप में प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे.नंद कुमार उपस्थित रहे। जिन्होंने स्वराज्य से स्वतंत्रता की ओर विषय पर व्याख्यान दिया । नगर के प्रसिद्ध डॉक्टर जयंत सुभेदार मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रहे । मुख्य वक्ता जे. नंद कुमार ने स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्षों का विस्तृत विवरण दिया ।आपने कहा की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष अट्ठारह सौ सत्तावन में नहीं उससे भी कई वर्षों पहले प्रारंभ हो चुका था एवं यह जो संघर्ष हुआ वह राष्ट्र के स्व-आधारित विचार से प्रेरित रहा है।उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता तब से मानी जाती है, जब हमसे जुड़ी हर बात स्व-निर्णय के आधार पर लागू हो जैसे रहन सहन, खान पान, शिक्षा आदी। स्व सत्ता के लिए शिवाजी द्वारा हिन्दवी स्वराज्य की कल्पना, लोकमान्य तिलक द्वारा स्वराज शब्द का प्रयोग यही सब दर्शाता है। उन्होंने कहा स्वतंत्रता संग्राम के गलत नैरेटिव को देश मे प्रचलित किया गया।यह संग्राम देशव्यापी, सभी वर्गों, जातियों, क्षेत्रों में लड़ा गया। यह सिर्फ पॉलिटिकल आंदोलन ना होकर कला,धर्म, कृषि, उद्योग, फ़िल्म, शिक्षा, संस्कृति सभी क्षेत्रों में स्व आधारित विचार पर लड़ा गया।
1885 में कांग्रेस की स्थापना को अंग्रेजों द्वारा सेफ्टी वाल्व की संज्ञा दी गयी थी, जिससे 1905 के बंग भंग षडयंत्र की विफलता के बावजूद अंग्रेज पूरे देश का विभाजन करने में सफल हो गए
।मुख्य अतिथि डॉ सुभेदार ने अपने परिवार के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को उल्लेखित करते हुए बताया कि उनके दादा जेल गए,दादी और पिताजी भी सेनानी रहे , पर उनके दिए संस्कार ऐसे थे कि उनके परिवार ने कभी भी सेनानियों को दी गई शासकीय सेवाओं का उपयोग नहीं किया ।कार्यक्रम का संचालन वैभव उपाध्याय ने किया । अतिथि परिचय समिति के सचिव डॉक्टर हितेश पाठक ने कराया। सरस्वती शिशु मंदिर के छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना का गायन किया गया एवं कार्यक्रम के अंत में वंदे मातरम गायन किया गया। आभार समिति अध्यक्ष विम्पी छाबड़ा ने दिया।बड़ी संख्या में रतलाम जिले के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे,जिनमें युवाओं की बड़ी संख्या रही।

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