- पूज्य मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी महाराज साहेब की निश्रा में हुआ दो दिवसीय दिव्य अनुष्ठान
- श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ गौशाला हेतु 51 हजार रुपए की राशि जीवदया में समर्पित की गई



मुंबई । प.पू.परोपकार सम्राट मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ति एवं समर्पित शिष्य पूज्य मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा में तारदेव सोनावाला संघ में आदिनाथ भगवान की 69 वीं ध्वजारोहण वर्षगांढ 2 दिवसीय महोत्सव के साथ सानंद सम्पन्न। प्रथम दिन प्रातः स्नात्र महोत्सव एवं 18 अभिषेक महापूजन विधान सानंद संम्पन्न किया गया। इसमें सूर्यदर्शन एवं चंद्रदर्शन विशेष चढ़ावे द्वारा किए गए। आदिनाथ दादा को रजत स्वर्णमय हार एक गुरुभक्त परिवार द्वारा अर्पित किया। प्रातः गुरुभगवंत का मंगल प्रवेश व प्रवचन किया गया।सायंकाल को सामूहिक आरती की गई। दूसरे दिन स्नात्र महोत्सव के पश्चात् सत्तर भेदी पूजन किया गया । नवमे पूजन में ध्वजा को गुरु भगवंत ने वासक्षेप किया। लाभार्थी हुक्कमाणि परिवार से तीन प्रदक्षिण देते हुए मंदिर शिखर पर अष्टप्रकारी युक्त ध्वजारोहण किया । जीवदया की उछमणी की गई। मुनिश्री ने प्रवचन में कहां जिसके जीवन में धर्म की जागृति है वही मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। शास्त्रों में कहा है धर्म समो नत्थी निही।धर्म के समान कोई निधि नहीं है। जीवन में सब है यदि धर्म नहीं है तो कुछ भी नहीं है,और धर्म वही है जो परमार्थ में लगे स्वार्थ से परे रहे। पर से परम की यात्रा में जुड़ने वाला महान बन सकता है। मानव जीवन दुर्लभ है। व्रत पच्चखाण इसी जीवन में है जो देवताओं को भी नसीब नहीं होता है, इसलिए धर्म करते हुए जीवन का कल्याण करें मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी की प्रेरणा से सोनावाला श्रीसंघ द्वारा 51 हजार रुपए की राशि मोहनखेड़ा तीर्थ गौशाला में देने की घोषणा की गई । श्रीसंघ के महानुभावों ने जीवदया एवं प्रभावना हेतु उत्साह पूर्वक लक्ष्मी का सदुपयोग किया। श्रीसंघ द्वारा मोदक व नमकीन पैकेट की प्रभावना की गई। 20₹ की प्रभावना एक गुर भक्त ने की। विधिकारक कांतिभाई कांदीवली ने शुद्ध विधि कराई । तारदेव श्वेतांम्बर मूर्ति पूजन श्री संघ सोनावाला ने सभी का तेहदिल से स्वागत किया। प्रवचन सभा में बदलापुर श्री संघ के सदस्यों ने 2t4 मार्च को श्री राजेंद्र सुरि गुरु मंदिर की 03 री वर्षगाढ पर भावभरी विनंती की, मुनिश्री ने स्वीकृति प्रदान की। सोनावाला श्रीसंघ ने श्री नवपद ओलीजी एवं चातुर्मास की भावभरी पुरजोर विनंती की, मुनिश्री ने थोड़े समय में विचार कर जवाब देने की बात कही। फागुन तेरस पर मुनिश्री ने वंदनावली भावयात्रा करा कर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया एवं बुधवार को बदलापुर के लिए विहार किया।