
दिल्ली रोहिणी सेक्टर ८ । मन की शुद्धि अध्यात्म से,वचन की शुद्धि व्याकरण से तथा काय की शुद्धि योग से ऑन लाइन अर्हम ध्यान योग की कक्षा में साधकों को श्वेत पिच्छा चार्य १०८ जैन आचार्य श्री विद्यानन्द जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य १०८ जैन आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी महाराज द्वारा zoom app के माध्यम से शुभाशीर्वाद प्राप्त हुआ । इस सुअवसर पर जैन आचार्य श्री प्रज्ञ सागरजी मुनिराज ने श्रावकों को महा मंत्र नमोकार सुनाया और जैन दर्शन में योग और ध्यान के महत्व को बहुत ही सुन्दर तरीके से समझाया।
आचार्यश्री ने अष्टांग योग का महत्व बताते हुए कहा यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और क्षमा ये आठ आयाम हैं। प्राचीन दिगंबराचार्य शुभचंद्र महा मुनिराज ने अष्टांग योग का महत्व बताया है। योग से ही हम शरीर की शुद्धि के साथ साथ आत्मा की शुद्धि कर सकते हैं, परिणामों में भावों में निर्मलता ला सकते हैं। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा रह सकता है। आप सभी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं, यह शुभ संकेत है। इसमें निरंतरता बनाए रखें और जीवन का मार्ग प्रशस्त करें।
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के प्रख्यात अधिवक्ता अजय जी जैन द्वारा संचालित ऑनलाइन अरहम ध्यान योग की कक्षा में २०० से भी ज्यादा साधकों ने गुरुदेव श्री प्रज्ञ सागरजी मुनिराज से आशीर्वाद प्राप्त किया और आचार्य श्री के श्री चरणों में भक्ति निवेदित कर अपने आप को धन्य माना। झुमरी तिलैया से श्रीमती रत्नीदेवी जैन ,जूली जैन , नविता जैन, विनोद जी जैन गंगवाल ,संजय-बबिता जैन भी इत्यादि ऑनलाइन के द्वारा काफी लाभ ले रहे हैंl कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा ने दी।