छपे हुए शब्दों का ऐतिहासिक महत्व हैं – डॉ. जय कुमार जलज

रतलाम । ऑनलाईन व सोश्यल मीडिया के समय में भी छपे हुए शब्दों का विशिष्ट महत्व हैं वे इतिहास की धरोहर होकर ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। लोकल वोकल नारा देश के साथ ही ग्रामीण अंचलों में प्रभावी हैं। किसी भी काव्य संकलन का प्रकाशन करना बहुत ही मुश्किल कार्य हैं जो समय साध्य के साथ श्रम साध्य भी हैं। नये रचनाकारों प्रतिभाओं को उभारने का काम अनुभूति संस्था लंबे समय से कर रही हैं। भारत के प्रसिद्ध भाषाविद् वैज्ञानिक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जयकुमार जलज ने साहित्यिक संस्था अनुभूति द्वारा अखिल भारतीय काव्य संकलन काव्यानुभूति के विमोचन समारोह स्थानीय मेडिकल कॉलेज के सामने होटल जलसारा सभागृह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् वैदिक साहित्य के मरमग्य डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि काव्यानुभूति संकलन में रचनाकारों की पीढिय़ों का सुन्दर समन्वय हैं। संकलन में वैदिक ग्रंथ हैं कमतर नहीं हैं इसमें कईं खुबियां समाहित हैं। युवा पीढ़ी को वरिष्ठ रचनाकारों की पूजा भाव से पढऩा चाहिए। आपने कहा कि बिना अध्ययन और चिंतन के लेखन में निखार नहीं आता हैं। डॉ. चांदनीवाला ने कालीदास एवं डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन के समय के कवियों को भी उधृत किया हैं। संस्था के सरंक्षक अभिभाषक विशेष अतिथि ठा. रमणसिंह सोलंकी ने अतिथि उद्बोधन में कहा कि साहित्य साधना की डगर कठिन होकर रोचक भी हैं। रतलाम नगर की माटी का नाम पूरे भारत में अनुभूति संस्था द्वारा रतलाम के रचनाकारों को पूरी निष्ठा के साथ साहित्य के विकास के लिये प्रतिबध्द किया हैं। इस अवसर पर विशेष अतिथि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश उपाध्याय क्षितिज जावरा ने विचार व्यक्त करते हुए सुमधुर गीत की प्रस्तुति प्रदान की। विशेष अतिथि के रूप में संयुक्त आयुक्त पंचायती राज प्रशिक्षण राउ जिला इंदौर के श्री प्रतीक सोनवलकर ने कहा कि काव्यानुभूति के प्रकाशन पर संस्था की पूरी टीम समर्पित भावना से कार्य किया जिसकी हम सराहना करते हुए शुभकामनाएं देते हैं। सोनवलकर जी ने स्व. दिनकर सोनवलकर जी की रचना का सस्वर संगीत के रूप में प्रस्तुत किया।
अनुभूति के अध्यक्ष डॉ. मोहन परमार ने संस्था की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि से लेकर 46 वर्षों की साहित्यिक विकास यात्रा की विशब्द व्याख्या की। सचिव रामचन्द्र गेहलोत अम्बर ने काव्यानुभूति के प्रकाशन के सबंध में अपने विचार व्यक्त किये। संस्था सरंक्षक दिनेश जैन द्वारा आगामी भविष्य की योजनाओं को सदन में विस्तार रूप से बताया। सम्पादक मण्डल के वरिष्ठ सदस्य प्रणयेश जैन ने प्रकाशन में आई बाधाओं का उल्लेख करते हुए संकलन में कवियों, गीतों और गजलों की साहित्यिक पड़ताल कर टिप्पणी प्रस्तुत की। इस अवसर पर मंत्रणा साहित्य परिषद् नागदा के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी एवं नगर के वयोवृध्द गीतकार श्री मणीलाल पोरवाल का संस्था सदस्यों द्वारा शाल से सम्मानित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना दीप प्रज्वलित कर शैलेन्द्र भट्ट एवं सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख कलाकार हेमन्त जोशी द्वारा प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत संस्था के वरिष्ठ साथी सुभाष यादव, रामचन्द्र फुहार, सतीश जोशी, सय्यद शौकत अली, श्रेणिक बाफना, अकरम शिरानी, प्रकाश हेमावत, जावरा के वरिष्ठ कहानीकार रमेश मनोहरा, डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया, हास्य कवि वरिष्ठ साहित्यकार धमचक मुल्थानी, डॉ. श्रीमती शोभना तिवारी, श्रीमती आशारानी उपाध्याय, दिनेश उपाध्याय आदि रचनाकारों ने अतिथियों व सम्माननीय सदस्यों का स्वागत किया। इस महति कार्यक्रम में सर्वश्री राजेश कांठेड़, राजेन्द्र रघुवंशी, डॉ. हरिकृष्ण बड़ौदिया, प्रभुलाल रावल, सुरेश माथुर, राजेश रावल, डॉ. शोभना तिवारी, सुश्री सोना नागर, श्रीमती आशा उपाध्यास, दिनेश उपाध्याय, मयूर व्यास, रमेश मनोहरा, सिद्धिक रतलामी, फैज रतलामी, अकरण रतलामी, डॉ. राजेश तिवारी, जगदीश चौहान सहित रतलाम जिले, इंदौर, उज्जैन, सैलाना, जावरा एवं नागदा जंक्शन के साहित्यकार एवं नगर के प्रबुद्ध वर्ग के लोग बहुसंख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन आशीष दशोत्तर एवं आभार संस्था के उपाध्यक्ष हरिशंकर भटनागर ने माना। 

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