महलवाडा में प्रवचनमाला का हुआ शुभारंभ, लोगों ने सीखी सकारात्मक जीवन जीने की कला
रतलाम, 11 मई। राष्ट्र-संत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि दुनिया में अच्छाइयाँ भी हैं और बुराइयाँ भी। आपको वही नज़र आयेगा जैसा आपका नज़रिया है। अच्छी दुनिया को देखने के लिए नज़ारों को नहीं, नज़रिये को बदलिए। हम केवल अच्छे लोगों की तलाश मत करते रहें, वरन खुद अच्छे बन जाएं। ताकि हमसे मिलकर शायद किसी की तलाश पूरी हो जाए। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो तकलीफ होती है। परंतु असली तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना लेता है। याद रखें, किसी को सजा देने से पहले दो मिनट रुकि ये। याद रखिये, अगर आप किसी की एक गलती माफ करेंगे, तो भगवान आपकी सौ गलतियाँ माफ करेगा। गलती जिंदगी का एक पेज है, पर रिश्ते जिंदगी की किताब। जरूरत पडऩे पर गलती का पेज फाड़िए, एक पेज के लिए पूरी किताब फाडऩे की भूल मत कीजिए। उन्होंने कहा कि बड़ी सोच के साथ दो भाई 40 साल तक साथ रह सकते हैं वहीं छोटी सोच उन्हीं भाइयों को 40 मिनट में अलग कर सकती है। भाई के प्रति हमेशा बड़ी सोच रखिए, क्योंकि दुख-दर्द में वही आपका सबसे सच्चा मित्र साबित होगा। याद रखें, पैर में मोच और दिमाग में छोटी सोच आदमी को कभी आगे नहीं बढऩे देती। कदम हमेशा सम्हलकर रखिए और सोच हमेशा ऊँची।
संतप्रवर बुधवार को श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ जैन संघ द्वारा नगर निगम के पास महलवाडा में आयोजित तीन दिवसीय जीवन जीने की कला पर प्रवचन सत्संग माला के शुभारंभ पर श्रद्धालुओं को सकारात्मक सोचने की कला सिखाते हुए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक मिनट में ज़िंदगी नहीं बदलती, पर एक मिनट में सोचकर लिया गया फैसला पूरी ज़िंदगी बदल देता है। केवल किस्मत के भरोसे मत बैठे रहिये। जीवन में योग्यताओं को हासिल कीजिए। किस्मत से कागज तो उड़ सकता है, पर पतंग तो काबिलियत से ही उड़ेगी। भाग्य हाथ की रेखाओं में नहीं अपितु व्यक्ति के पुरुषार्थ में छिपा है। इस दुनिया में नसीब तो उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते। हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है। मान लिया तो हार और ठान लिया तो जीत।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढऩे के लिए आत्मविश्वास जगाइये। खाली बोरी कभी खड़ी नहीं रह सकती और तकिये से कभी कील ठोकी नहीं जा सकती। जो लोग अपने हाथों का उपयोग हाथ पर हाथ रखने के लिए करते हैं, वे हमेशा खाली हाथ ही बैठे रहते हैं। भाग्य की रेखाएँ चमकाने के लिए लक्ष्य के साथ मेहनत कीजिए, आप पाएँगे आपकी किस्मत केवल चार कदम दूर थी। उन्होंने कहा कि भाग्य को हरा-भरा रखने के लिए सदा सत्कर्म का पानी डालते रहिये। आखिर हरी घास तभी तक हरी रहेगी, जब तक उसे पानी मिलता रहेगा। जीवन में केवल लाभ ही मत कीजिए कभी उसे पलट कर लोगों का भला भी कीजिए।
इस दौरान डॉ मुनि शांतिप्रिय सागर ने कहा कि
जीवन बांसुरी की तरह है, जिसमें बाधाओं रूपी कितने भी छेद क्यों ना हों ,लेकिन जिसको उसे बजाना आ गया, समझ लीजिए उसी जीना आ गया। उन्होंने कहा कि लोग कैसा जीवन जीते हैं उसे देख कर मत जियो, बल्कि जैसा जीवन जीना श्रेष्ठ होता है वैसा जिओ ।अच्छा जीवन तो खुद को भी अच्छा लगता है और दूसरों को भी।
उन्होंने कहा कि जीवन को सुकून भरा बनाने के लिए 5 मंत्र अपने साथ जोड़ सकते हैं। पहला है विचार शैली को पॉजिटिव बनाएं ताकि आपके व्यवहार में हमेशा माधुर बना रहे।दूसरा जीवन में जो मिल रहा है उसका स्वागत कीजिए शिकायत मत कीजिए क्योंकि शिकायत आपके मन को हमेशा दुखी करती रहेगी। तीसरा जीवन में संतुष्ट रहने की आदत डालिए दुनिया में किसी को क्या मिल रहा है यह देख कर अपने मन को निराश करने की वजह एक बात हमेशा याद रखिए कि भगवान ने जो दिया है वह भाग्य से ज्यादा दिया है।
चौथा सूत्र देते हुए संत श्री ने कहा कि मुस्कुराने के अवसर हमेशा तलाश थी रहिए मुस्कुराता हुआ इंसान जहां रहता है वही स्वर्ग होता है। पांचवा मंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी लोग ना लें और जो प्राप्त है वह पर्याप्त है अगर यह बातें हमारे जीवन में उतर जाती हैं तो हम मानसिक रूप से तो स्वस्थ रहेंगे ही और हमारा जीवन स्वर्ग और सुकून से भर जाएगा।
प्रवचन की शुरुआत नवकार मंत्र के सामूहिक पारायण से हुई।
इससे पूर्व राष्ट्रसंतों के नगर आगमन पर श्रद्धालु भाई बहनों द्वारा धूमधाम से स्वागत किया गया। सत्संग शोभायात्रा बाबा साहब जैन मंदिर से शुरू हुई जो मेन बाजार से होते हुए त्रिपोलिया गेट पहुंची। इस दौरान युवाओं ने गुरुदेव के जयकारे लगाकर स्वागत किया। धर्म संघ की बहनों ने अक्षत उछाल कर गुरुजनों का बधावणा किया।
कार्यक्रम में संघ अध्यक्ष मनसुख चोपड़ा, विक्रम सिंह कोठारी, राजेंद्र कोठारी, कांतिलाल चोपड़ा, शैलेंद्र पावेचा, ऋषभ पावेचा ,जय चोपड़ा अनिल संचेती, पारस चोपड़ा, अशोक चोपड़ा, चितरंजन लालन, श्रेणिक सराफ, शरद चौरडिया, आलोक गांधी, भूपेंद्र कोठारी, हेमंत बोथरा आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।
गुरुवार को होंगे रात्रि 8:00 बजे विशेष प्रवचन-राष्ट्रसंत गुरुवार को रात्रि 8:00 से 10:00 बजे तक महलवाडा में आम जनता को मधुर जीवन के मूल मंत्र पर मार्गदर्शन देंगे।