मंदबुद्धि बालिका से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड

जावरा । न्यायालय (श्रीमती उषा तिवारी) विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट जावरा जिला रतलाम (म.प्र.) के द्वारा अपने निर्णय दिनांक 02.06.2022 को अभियुक्त थावर पिता परथा बागरी उम्र 26 साल निवासी आलमपुर ठिकरिया जिला रतलाम म.प्र. को धारा 376एबी भादवि में आजीवन कारावास जो शेष प्राकृत जीवन के लिए होगा व 5000/- रुपये अर्थदण्ड से एवं धारा 366 भादवि में 07 वर्ष सश्रम कारावास व 1000/- रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी / विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट जावरा श्री विजय पारस ने बताया , अभियोक्त्री की माता ने दिनांक 31.05.18 को थाना रिंगनोद पर उपस्थित होकर घटना बताई कि वह अपने भाई के घर पर ही निवास करती है, उसके साथ उसकी लड़की जिसकी उम्र 07 साल की है, जो शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर (विक्षिप्त) होकर बोल नहीं पाती है वह भी रहती है। सायं करीब 7बजे वह और उसकी लडकी घर के बाहर बैठे थे कि थोडी देर बाद वह घर के अंदर खाना बनाने चली गई, उसके कुछ देर बाद बाहर आकर देखा तो लडकी नहीं दिखी, इतने भाई आया मैंने उससे भी पूछा तो उसने भी मना कर दिया फिर गांवो के लोगो से लडकी के बारे में पुछता की, तो उन्होने बताया कि थावर दादा लडकी को उठाकर खेत तरफ ले गया। फिर हम सभी लडकी को ढूढते खेत पर गए जहा हमने देखा कि थावर लडकी के साथ दुष्कर्म कर रहा था। हमें देखकर आरोपी मौके से भाग गया था। फरियादिया द्वारा बताई गई उक्त घटना पर से थाना रिंगनोद पर आरोपी थावर के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र आरोपी के विरुद्ध माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो में प्रस्तुत किया गया।
माननीय विशेष न्यायालय में अभियोजन की ओर से घटना को प्रमाणित करने हेतु कुल 23 साक्षियो में से 12 साक्षियों को अपने समर्थन में परीक्षित कराया गया एवं मौखिक, दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्य डी.एन.ए. रिपोर्ट तथा लिखित बहस प्रस्तुत कर आरोपी को आरोपित धाराओ में उल्लेखित अधिकतम दंड से दंडित किये जाने के तर्क प्रस्तुत किये गये। माननीय न्यायालय द्वारा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को से अपराध प्रमाणित मानते हुए निर्णय दिनांक 02/06/2022 को अभियुक्त को दोषसिद्ध किया गया।
आरोपी द्वारा उठाये गये तर्क –
आरोपी द्वारा अपने बचाव मे उठाये गये मुख्य आधार यह थे कि पीडिता के न्याायालय में कथन नही कराये गये है फलत अपराध प्रमाणित नही होता है। इस संबंध मे अभियोजन द्वारा बालिका के मेडिकल परीक्षण करने वाले दो चिकित्सको की रिपोर्ट का हवाला दिया गया जिसमें चिकित्सको द्वारा यह तथ्य भली भांति प्रमा?णित किया गया है पीडिता जन्म से मंदबुद्धि थी एवं बोल नही सकती है। इस संबंध में अभियोजन द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यापयालय के न्यादयदृष्टांतो के माध्यम से न्यायालय के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि दुष्कर्म के मामलों में पीडिता के कथनों के अभाव में भी अन्य? साक्ष्य के माध्यम से आरोपी को दोषसिद्ध किया जा सकता है।
अभियुक्त् द्वारा यह भी बचाव लेने का प्रयास लिया गया कि बालिका की माता के अतिरिक्त् किसी भी साक्षी द्वारा घटना का समर्थन नही किया गया है। इस बचाव का अभियोजन द्वारा मेडिकल एवं डीएनए रिपोर्ट के माध्यम से माननीय न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा गया कि दुष्कर्म के मामलो में पीडिता अथवा उसके परिजन अपनी लाज एवं सम्मान को दाव पर लगाकर न्या्यालय के समक्ष जो कथन करते है उन पर विश्वास किया जाना आवश्यक है इसके लिये किसी अन्य साक्षी के समर्थन की आवश्यथकता नही है। शासन की ओर से प्रकरण की पैरवी विशेष लोक अभियोजक श्री विजय पारस अति. जिला लोक अभियोजन अधिकारी जावरा जिला रतलाम द्वारा की गयी।

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