


पुणे । पुणे में परोपकार सम्राट आचार्य देव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के प्रथम पुण्योत्सव निमित्ते विराट गुणानुवाद सभा का आयोजन अहिंसा भवन दादावाड़ी पुना में किया गया।
परोपकार सम्राट जैनाचार्य श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के शिष्य परम पूज्य पुण्योत्सव प्रेरक मुनिराज श्री रजतचंद्रविजयजी म.सा. मुनिश्री ललितेश विजयजी म.सा. तपस्वी मुनिश्री जनकचंद्र विजयजी म.सा.की निश्रा में हजारों की संख्याो में गुरुभक्त उपस्थित थे।
सर्वप्रथम परोपकार सम्राट को गुरु वंदना की गई पश्चात श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.की तस्वीर पर तीनों मुनियों ने वासक्षेप पूजा कर भावांजलि अर्पित की। धर्मसभा ने गुरु वंदन किया। उपस्थित महाड़,वाई, दौंड, तलेगांव,भोसरी आदि अनेक संघों के एवं पुना के विभिन्न ट्रस्टों के महानुभावों ने प्रभु व गुरु के चित्र समक्ष धुप दीप प्रज्वलन किया पुष्पहार अर्पण करके श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरूवात में राजस्थान नाडोल के देवेन्द्र रमेश कुमारजी पारेख परिवार की बहनों ने देवगुरु के चित्र समक्ष अक्षत श्रीफल से गहूली की। संगीतकार
तरुण मोदी ने गुरुभक्ति गीतों से समाबांधी। विराट धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. ने अपने गुणानुवाद में कहा कि आचार्य श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.ने मोहनखेड़ा तीर्थ को जन-जन का तीर्थ बनाया। ऋषभ बाबजी के नाम से उनकी पहचान थी, श्रद्धालु भक्त उनको मसिहा की तरह पूजते थे। वे जीवदया प्रेमी थे तथा हर दुखियो के दर्द का निवारण करते थे। जीवन के अंतिम दिनों में भी कोरोना महामारी के समय 300 बेड के होस्पीटल की व्यवस्था मोहनखेड़ा में कर अनेकानेक लोगों के प्राण बचाए । परोपकार करते हुए करिबन 45 से 50 हजार लोगों के आंखो के ऑपरेशन निशुल्क करवाए। जीवदया के उद्देश्य को लेकर गोशाला का निर्माण किया। मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है इस उद्देश्य को लेकर कई परोपकार मंगलमय कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। अनेक राजकीय नेतागण सामाजिक हस्तियां मोहनखेड़ा तीर्थ पर उनके दर्शन और आशीर्वाद लेते थे। पूज्य मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी ने आगे कहा गुरु कभी विदा नहीं होते हैं वह अपने कार्यों से हमेशा याद रहते हैं। मुनिश्री ने कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सेवार्थी किशोर हिंगड़ प्रवीण परमार एवं मिठालाल जैन की प्रशंसा की।
इस अवसर पर मुनिश्री ललीतेश विजयजी ने व मुनिश्री जनकचंद्र विजयजी ने परोपकार सम्राट के कार्यों की गाथा आपने गुणानुवाद में की।
गुणानुवाद सभा में पुणे और बाहर गांव से कई गुरुभक्त तथा कई संघों के पदाधिकारी दूर दूर से पधारे थे। विमल संघवी एवं विलास जैन ने श्री ऋषभचंद्र सुरीश्वरजी की पूरी जीवन कहानी अपने मनोगत द्वारा प्रस्तुत की। परोपकार सम्राट की आरती का लाभ देवेन्द्र रमेश कुमारजी पारेख को मिला। इस मौके पर पुणे शहर के नितिन जैन,मीठालाल जैन,महेंद्र रांका,प्रवीण परमार,किशोर हिंगड़, घेवरचंद ढालावत और जैन समाज की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित थी। पूरे कार्यक्रम का आयोजन श्री सूरी ऋषभ गुरुभक्त मंडल द्वारा किया गया। मंच संचालन मांगीलाल सोलंकी ने किया।