

नीमच । जीव दया से मानव जीवन में पुण्य बढ़ता है। जीव दया से कष्टों का सहार होता है। जीव दया बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है ।जीव दया संसार की सबसे बड़ी सेवा होती है। मुक प्राणी पशु पक्षियों के लिए दाने की व्यवस्था करना सबसे बड़ा पुण्य परमार्थ का कार्य है ।यह बात राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने कही। वे इंदिरा नगर जैन आराधना भवन में शनिवार सुबह 9बजे आयोजित जन जागृति धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीव दया मैं किया गया परमार्थ का पुण्य कभी खाली नहीं जाता है इसका फल सार्थक सिद्ध होता है ।मनुष्य स्वार्थ के कारण अवसरवादी बनता जा रहा है जब वह परेशानी में होता है तब धर्म की ओर आता है। यदि व्यक्ति समय रहते हैं निरंतर धर्म करता रहे तो उसके जीवन में कभी भी कष्ट नहीं आता है। संकल्प शक्ति की उर्जा जगाता है वह परमात्मा का स्वरूप बनता है। संकल्प जितना बड़ा होगा सफलता उतनी बड़ी होगी ।खाना पीना तो पशु पक्षी भी करते हैं ।अहंकार जीवन को खोखला कर रहा है। अपना पराया के भेद को मिटाएं। संकल्प नहीं तो सामान्य संकल्प लेकर धर्म पुण्य का कार्य करना चाहिए जिस प्रकार सबरी मैं राम जाने का संकल्प लिया था तो 1 दिन राम को आना ही पड़ा । सूरदास आंखों से अंधे थे लेकिन उन्होंने समाज को सच्चाई और धर्म की राह दिखाई। जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है। स्वार्थ के कारण आदमी इतना अंधा हो गया है कि वह पाप कर्म करने को मजबूर हो गया है ।स्वार्थ आत्मा को गिराने वाला है। लेकिन स्वार्थ के लिए पाप कर रहा है जबकि स्वार्थ का त्याग करना चाहिए संकल्प शक्ति से बीमारी मिटेगी व्यापार में सफलता मिलती है ।धर्म का सम्मान करेगा तो धर्म उसका सम्मान करेगा । छोटा बच्चा जन्म लेता है तो उसके दूध की व्यवस्था करते हैं और नुकसान भी हो जाए तो सहन करना चाहिए ।गौ माता की सेवा साधना से बड़ी कठिनाई दूर हो सकती है ।समाज सेवा के लिए शांतिनाथ पक्षी विहार स्थापना की गई है जिसमें समाज जनों ने कमल मुनि की प्रेरणा से 24 बोरी अनाज के दान देने की घोषणा की। इस अवसर पर भजन गायक कलाकार राजेश चौधरी खन्ना ने ले लो कोई प्रेम का प्याला आवाज लगाऊ गली गली मधुर कर्णप्रिय गीत प्रस्तुत किया।।धर्म सभा के समापन पर धर्म प्रभावना का वितरण किया गया।संत गौतम मुनि मसा ने भी धर्म सभा को संबोधित किया धर्म सभा में कमल मुनि जी महाराज साहब द्वारा मांगलिक श्रवण करवाकर आशीर्वाद प्रदान किया गया। धर्म सभा में संत घनश्याम मुनि कौशल मुनि त्रिलोक मुनि अक्षय मुनि आदि का सानिध्य मिला।