योग दिवस पर सुश्री प्रज्ञा पुरोहित ने कहा

रतलाम । योग को जानो और करो जिससे आप शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक के रूप साथ-साथ स्वयं की आत्मा का अध्ययन ही आसन है प्राणायाम के माध्यम से आसन को धीरे-धीरे एवं सही करने से शरीर को लाभ होता है ।
उक्त बात श्री सांई योग साधना केन्द्र एवं योग धाम परिवार द्वारा आयोजित श्री सांई सभागृह में योग प्रशिक्षका सुश्री प्रज्ञा पुरोहित ने कहीं । आपने कहा कि प्राणायाम जो अपने आपको नियंत्रित करें, ध्यान कर समाधि खुशी बाहरी वस्तु पर निर्भर होती है । आनंद की अनुभूति परमात्मा के अंदर है।
श्रीमती दिव्या शक्तावत ने कहा कि योग दिवस एक दिन मनाने के बजाय हर दिवय योग दिवस हो जिससे स्वस्थ रहे । जिन्होनें योग प्रारम्भ किया वे महर्षि पतंजली थे । योग मानसिक जीवन को सफल बनाने के माध्यम है । योग के आठ नियम है (1) यम (2)नियम (3)आसन (4) प्राणायाम (5)प्रत्याहार (6)धारणा (7) ध्यान (8) समाधि।
आपने आश्चर्य प्रकट किया की योग भारत की देन है लेकिन विदेशो में वे अधिक लोकप्रिय हो रहा है ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमाली ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष श्री प्रकाश व्यास ने कहा कि रतलाम नगर के प्रत्येक संस्थानों को योग को अपनाना चाहिए जिससे हम स्वस्थ लाभ ले सके । श्री सांई योग केन्द्र के निर्देशक डॉ. प्रदीप कोठारी ने कहा कि योग संगठित रहकर करने से अधिक लाभ होता है। आपने डॉ. प्रज्ञा पुरोहित एवं श्रीमती दिव्या शक्तावत जी के अनुभवों का लाभ लेने की अपील की है ।
इस अवसर पर योगधाम के डी.के. शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए । योगधाम के मिश्रीलाल सोलंकी ने कहाकि विषम परिस्थितियों में पत्रिका का प्रकाशन किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता दीपा पुंजावत ने की । प्रारम्भ में रामचन्द्र गेहलोत ने मां सरस्वती वंदना की ।
अतिथियों का स्वागत डॉ. प्रदीप कोठारी, प्रियंका बाफना, एडव्होकेट मंजु सोनी ने किया । कार्यक्रम में महावीर सिंह शक्तावत, मनसुखलाल चौपड़ा, हेमंत मेहता, रतन जोशी, प्रमोद राघव, सत्यनारायण मंत्री, महेन्द्र सिसौदिया, प्रकाश जैन, जिनेन्द्र चौपड़ा, सुनिता पाण्डे आदि उपस्थित थे । अंत में प्रकाश जैन द्वारा प्राकृतिक आधार का नाश्ता एवं ज्युस का वितरण किया । इस अवसर पर अतिथियों ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग धाम पत्रिका का महायोग विशेषांक का विमोचन किया । कार्यक्रम का संचालन जी.एस. खिंची ने किया एवं आभार प्रकाश चौपड़ा ने महामंगलिक के साथ माना ।