रतलाम 04 अगस्त। भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत का प्रतीक इंदौर–फतेहाबाद चंद्रावतीगंज एवं डॉ. अंबेडकर नगर (महू)–इंदौर रेलखंड आज 150 वर्षों से अधिक की गौरवशाली यात्रा पूर्ण कर चुका है। 03 अगस्त 1876 को पहली बार इस रेलखंड पर रेल संचालन प्रारंभ हुआ था, जिसने मालवा क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम रेलवे का रतलाम मंडल इस ऐतिहासिक अवसर पर अपनी इस अमूल्य धरोहर को श्रद्धापूर्वक नमन करता है। विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक रेल अवसंरचना के विकास एवं यात्री सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से इस ऐतिहासिक रेलमार्ग को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने के लिए मंडल निरंतर कार्य कर रहा है।
महू–इंदौर लगभग 21 किलोमीटर तथा फतेहाबाद चंद्रावतीगंज–इंदौर लगभग 40 किलोमीटर लंबा यह मीटर गेज रेलखंड अपने समय में मालवा क्षेत्र को देश के अन्य भागों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी था। इस रेलमार्ग ने व्यापार, कृषि, उद्योग एवं जनसंपर्क को नई गति प्रदान की तथा क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समय के साथ भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक रेलखंड का आधुनिकीकरण करते हुए इसे ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया तथा आधुनिक सिग्नलिंग, बेहतर परिचालन व्यवस्था और उन्नत यात्री सुविधाओं से सुसज्जित किया। वर्तमान में यह रेलखंड पश्चिम रेलवे के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और प्रतिदिन हजारों यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं विश्वसनीय रेल सेवा उपलब्ध करा रहा है।
रतलाम मंडल भारतीय रेलवे की इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, सुरक्षित रेल संचालन एवं यात्री-केंद्रित सेवाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। मंडल का उद्देश्य अपनी गौरवशाली विरासत को संजोते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वस्तरीय रेल सेवाएं उपलब्ध कराना है।