चातुर्मास काल में धर्म आराधना करने से 10 गुना फल मिलता है – नवदीक्षिता अरुण कीर्तिजी मसा

रतलाम। संसार में आत्मा शाश्वत है जिसका हम ख्याल नही रखते है और जो शरीर नश्वर है उसकी दिन रात साज सम्भाल करते है । सर्दी, गर्मी, बारिश में शरीर के लिए जो जो जब जब अनुकूल होता है, तब तब हम शरीर को वो उपलब्ध करवाते है । जिसे भी हमें अपना समझता है वो यही कहता है की अपने शरीर का ख्याल रखना, केवल सन्त सती हमें कहते है की आत्मा का ख्याल रखो ।
शरीर को पुष्ट करने के लिए सैकड़ो आयटम बनते है और आप शौक से उनका सेवन भी करते हो, लेकिन आत्मा को पुष्ट करने के लिए कोई प्रयास नही करते हो। कोई दूसरा हमारी आत्मा का दमन करे उसके पूर्व हमें स्वंय अपनी आत्मा का दमन करना होगा। आत्मा का दमन करने के लिये सर्वप्रथम शरीर से ममत्व कम करना होगा।
चातुर्मास काल में धर्म आराधना करने से 10 गुना फल मिलता है । जिनवाणी श्रवण करने से नारकीय आयुष्य घटता है और देवलोक का आयुष्य बढ़ता है । दिन के 24 घण्टे में प्रत्येक घण्टे में से 2 2 मिनिट निकाल कर 48 मिनिट की शुद्ध सामायिक करोगे तो भी पुण्य की प्राप्ति होगी। उपरोक्त सारगर्भित प्रवचन पुयाश्री तप चक्रेश्वरी अरुणप्रभा मसा ने करमचंद जी के उपाश्रय की महती धर्मसभा में प्रदान किये।
नवदीक्षिता अरुण कीर्तिजी मसा ने अपने उद्बोधन में फरमाया की आपको परमात्मा के दर्शन करना पसंद है जबकि आपको स्वंय परमात्मा बनना पसंद करना चाहिए। जिसने संसार में एडजेस्टमेंट करना सीख लिया जो संसार में शांति से रह सकता है।
जिस घर में आप रहते हो वो नश्वर है, शाश्वत घर सिर्फ मोक्ष है, और मोक्ष की प्राप्ति के लिए संयम जरूरी है। दिनाँक 30 जून गुरुवार के प्रवचन शांतिनगर में होंगे।

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