कहने को लोकतंत्र पर है पार्टी वाद

कब सही मायने में लोकतंत्र होगा, कब तक जनता छलती जाएगी।

अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

लोकतंत्र व्यवस्था में व्यक्ति खड़ा होता है जनता उसे जीताती है अपना प्रतिनिधि बनाती है, बात चाहे राज्य सरकार, केंद्र सरकार या स्थानीय निकाय की हो सभी जगह पर अब राजनैतिक पार्टी के माध्यम से व्यक्ति खड़ा होता है और लोग पार्टी वाद के आधार पर जिताने लगे। जिस पार्टी की संख्या ज्यादा हो सत्ता और सरकार उसी की हो जाती है। अब उस पार्टी में यदि किसी सदस्य का मतभेद हो जावे तो वह अपने कुछ साथियों के सहित पार्टी छोड़ देता है और विपक्षी पार्टियां इसी मौके की तलाश में रहती है और सत्ता पलटने में लग जाते हैं यही मध्यप्रदेश में हुआ अब महाराष्ट्र में ऐसे कई राज्य में हो रहा है। ऐसी स्थिति में कुछ चुने हुए प्रतिनिधि सिर्फ सत्ता पाने में लग जाते हैं। जनसेवा एक दिखावा रह जाता है। जब पार्टी के नाम पर टिकट नहीं निर्दलीय व्यक्ति खड़ा होगा और कोई ग्रुप बनाकर नहीं परंतु व्यक्ति की सही योग्यता के आधार पर सरकार में रहेंगे तभी सच्चे महीने में लोकतंत्र का निर्माण होगा। आजकल अनेक नेता जनसेवा का कहते जरूर है लेकिन वह जानते है कि सबसे तेजी से पावर और पैसा कमाने का मुख्य साधन नेतागिरी ही है। पार्टी वाद के कारण कई नेतागिरी नहीं करते पर पार्टी से जुड़ने के माध्यम से अथाह पावर और पैसा कमाते हैं। ईमानदार नेता गिरी बस कुछ ही दिलों में।

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