रतलाम मध्यप्रदेश आयुर्वेद महासम्मेलन के उपाध्यक्ष वैद्य दिनेश जोशी ने कहा कि हम चिकित्सकों की आवश्यकता देवताओं को भी होती थी,इसलिए हमारी उपयोगिता सृष्टि के आरंभ से अंत तक बनी रहेगी। आज हम जिस महान विभूति डा. विधानचंद राय के जन्म एवं प्रयाण दिवस पर चिकित्सक दिवस मना रहे है, ऐसे देश में अनेक परोपकारी, सेवाभावी, दयावान तथा कुशल चिकित्सक हुए है जो हमारे लिए प्रेरण स्त्रोत है।
मुख्य अतिथि वैद्य जोशी ने यह बात विश्व चिकित्सा दिवस पर अखिल भारतीय महासम्मेलन जिला शाखा के चिकित्सा मिलन एवं सम्मान समारोह में व्यक्त किए।
वैद्य जोशी ने कहा कि वर्ष 1990 के बाद इस व्यवसाय का अवमुल्यन होने लगा। बड़े नर्सिंग होम, बड़े डाक्टर्स, बड़़ी व्यवस्था इन सबकी निगाहे मरीज की जेब पर रहती है। इसलिए भगवान धनवंतरि के देेश में हजारों लोग कोरोना काल में अकाल मौत के शिकार हो गए।
जिलाध्यक्ष डा. आई.पी. त्रिवेदी ने आयोजन पर तथा डा. शिवमंगलसिंह सुमन शौर्य संस्थान की प्रमुख डा. शौभना तिवारी ने विश्व चिकित्सा दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर नगर के प्रमुख डा. सुरेन्द्र पुरोहित, डा. डी.सी. राठौर, डा.केपी सोनी, डा. केजे अग्रवाल, डा. केएस सोनगरा, डा.ओपी जोशी सैलाना, डा. राजु तिवारी, डा. दिलीप पण्ड्या, डा.डीवी मौर्य, डा. जयेश पटेल, डा. निर्मला डांगी,डा. हरिओम तिवारी , डा. एम.एस. चौहान, डा.बीएल डांगी, डा. सुभाष राय, डा. दिनेश पोरवाल, डा. दिनेश तिवारी, डा. के.एस. पुरोहित , डा. एम.एस. सिसौदिया, डा. सतीश माथुर, डा. भानुप्रतापसिंह सोनगरा, डा. रामेश्वर सोनी, जड़ीबुटी चिकित्सक रामजी कुमावत, डा. रहमान, डा. अकील सिद्दीकी एवं संस्था के सचिव डा. राधेश्याम सोनी उपस्थित थे। इस अवसर पर अतिथि चिकित्सकों का स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।