प.पू.प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. एवं मुनिश्री मंगलचन्द्र विजयजी म.सा.के चातुर्मास का मंगल प्रवेश धूमधाम से हुआ

रायगढ़ । रायगढ़ जिले के महाड़ में 09 जुलाई 22 को गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरश्वरजी म.साहेब के सुशिष्य प.पू.प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.साहेब एवं मुनिश्री मंगलचन्द्र विजयजी म.सा.के चातुर्मास का मंगल प्रवेश धूमधाम से वाजते गाजते हुआ । जिसमे बड़ी संख्या में लोगो ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य शोभायात्रा (वरघोड़े) से हुई छगनलालजी कटारिया परिवार की बहनों ने 36 कलश के साथ सामेला किया। जो वीरेश्वर मंदिर से शुरू हो कर नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए जैन मंदिर पहुंचे। प्रभुजी एवं गुरुदेव के चित्र को लेकर श्रद्धालुओं बैठे थे।‌‌ जहां देव गुरु के दर्शन वंदन करने के पश्चात् नगरवासी गाजे बाजे के साथ मुनिराजश्री को पुनः वीरेश्वर लेकर पहुंचे। वरघोड़े में नगर के महिला, पुरुष बच्चों ने एक जैसे परिधान पहन एकता का संदेश दिया। वही पुरुषों के सर पर पंचरंगी पगड़ी और महिला के सर पर कलश आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान वाई से आया बैंड और स्पेशल ढोल नगाड़े की टीम ने वरघोड़े में चार चांद लगा दिए। जो वरघोड़े में नाचते गाते मुनिराज की अगवानी में नजर आ रहे थे। इस दौरान जगह जगह मुनिराज के वंदन में गहूंली की जा रही थी। वीरेश्वर मंदिर में पहुंच कर उपस्थित गुरुभक्तो ने मुनिराजश्री को सामूहिक वंदन किया। मुनिश्री ने मंगलकारी मंगलाचरण सुनाया एवं ध्यान कराया।
त्रिशाला महिला मंडल महाड़ ने स्वागत गीत की शनादर प्रस्तुति दी, साथ ही इंदापुर महिला मंडल ने मंत्रमुद्ग कर देने वाली एंट्री प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ दादा की प्रतिमा, गणधर गौतम स्वामीजी की प्रतिमा एवं राजेंद्र सूरीजी की प्रतिमा पर बाहर से पधारे अतिथियों ने दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण किया। आगामी विराट श्री गौतम लब्धि महापुजन अनुष्ठान के बैनर का विमोचन किया। यह विशिष्ट अनुष्ठान 7 अक्टूबर 22 को होगा। पू.मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा चातुर्मास भूल को सुधारने का एवं आत्म कल्याण करने का पर्व है। बारिश होने से जीवों की उत्पत्ति होती है इसलिए जैन साधु का विहार निषेध है। एक जगह रहकर धर्म उपदेश देकर धर्म आराधना करके आत्म कल्याण करना चाहिए। इस मौके पर मुनि श्री अपने गुरुदेव श्री को विशेष रूप से याद किया। मुनिश्री ने बाहर से पधारे श्री संघ सदस्य एवं अतिथियों का नगर की महिला मंडल को साधुवाद दिया। चातुर्मास समिति अध्यक्ष अशोकजी जैन, श्रीसंघ के अध्यक्ष दिलीपजी व खजांची प्रवीण भाई कटारिया निलेश जैन व युवा मंडल एवं महिला मंडल को कई जिम्मेदारी सौंपी। गुरु भगवंत के श्रीमुख से वाणी का श्रवण कर नगरवासी और बाहर से आए गुरुभक्त धन्य हुए।‌ इस अवसर पर भिवंडी से आए महेंद्र जैन, सातारा से आए भरत ओसवाल ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। वही बाहर से पधारे अतिथि और विभिन्न श्रीसंघ का स्वागत सत्कार किया गया। जिसमें मुम्बई, भिवंडी, ठाणा,पुणे, तलेगांव,पाली,परली, मानगांव, इंदापुर, रोहा, नागोठाणा, दापोली, म.प्र.के इंदौर, राजगढ़, थांदला, बड़नगर, झाबुआ, खारुआकलां, खरसोदकलां,एवं आस-पास क्षेत्र के कई श्रीसंघ के महानुभाव शामिल हुए। जिसके बाद कार्यक्रम में चढ़ावे का क्रम शुरू हुआ। चढ़ावे में सर्वप्रथम गहूंली के लाभार्थी क्षेत्र के शिवसेना विधायक और वर्तमान मंत्री भरतसेठ गोगावले, चातुर्मासिक मंगल कलश के लाभार्थी मोहनखेड़ा गुरधाम दहानू ट्रस्ट मंडल के भरत भाई भूपेश भाई सोलंकी उत्तमजी जैन रमेशजी जैन,गुरुपूजा के लाभार्थी अजय कुमार हीराचंद की सोलंकी तलेगांव, कामली ओढ़ाने के लाभार्थी गुरुदेव के खास भक्त हस्तीमलजी ओसवाल, बेटा बहु रवीद्रजी अनिताबेन ओसवाल रहे। महाड़ नगर में लोगो के बीच 100 साल बाद चातुर्मास के अवसर की खुशी, उमंग और उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर एमएलए भारत सेठ गोगावले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष स्नेहलता दीदी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने अपना उद्बोधन भी दिया। भरत सेठ गोगावले ने मां भगवती कश्मीरी देवी सरस्वती देवी मां के महापूजन को कराने की घोषणा की है एवं गुरुदेव से आशीर्वाद लिया। साथ ही बाहर से आए और नगर के कई गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नवकारसी स्वामीवात्सल्य, जय जिनेन्द्र, सामेला व चातुर्मास के विशेष लाभार्थी का बहुमान किया गया।
13 जुलाई को मुनिश्री के मुखारविंद से प्रथम महामांगलिक का विशिष्ट आयोजन किया गया है। जिसमें पधारने वाले श्रद्धालु एक श्रीफल लेकर पधारेंगे।

Play sound