

मंदसौर जीवा गंज 21 जुलाई 2022 । अमृत जैसा ज्ञान भी विनय के अभाव में अहंकार रूपी जहर के कारण वरदान के बजाय अभिशाप के रूप में परिवर्तित हो जाता है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जैन दिवाकर प्रवचन हाल में संबोधित करते कहा कि विनय की नींव पर ही साधना की मंजिल खड़ी की जा सकती है विनय हीधर्म का प्रवेश द्वार है ।
उन्होंने कहा कि विश्व के सभी धर्मों में विनय को सर्वोपरि स्थान दिया है विनय के द्वारा उपार्जित किया गया बिंदु जितना ज्ञान भी सागर के रूप में परिवर्तित हो जाता है ।
मुनि कमलेश ने बताया कि विनय विकास का मार्ग है अहंकार दुर्बुद्धि को पैदा करता है आत्मा को मलिन बनाता है विनाश का मार्ग है। राष्ट्रसंत ने कहा कि ज्ञान का सच्चा श्रृंगार भी विनय ही है इसके द्वारा गुरु और भगवान तक को वश में किया जा सकता है ।
जैन संत ने कहा कि खड़ा-खड़ा सूख जाए कितनी ही कठोर साधना कर ले दान दे तीर्थ यात्रा करे विनय के बिना सार्थक और सफल नहीं हो सकती अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मुख्य नई दिल्ली के वरिष्ठ कार्यकर्ता पारसमल जैन चारों महीना गुरुदेव की सेवा में परिवार और व्यापार से निवृत्त होकर समर्पित हो गए हैं युवा तपस्वी हितेश जैन खिलचीपुरा के 11 आज उपवास है 31 उपवास के पचकान ली आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी महाराज साहब की जयंती पर सप्त दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है तपस्वी घनश्याम मुनि जी के आज बारवा उपवास है गौतम मुनि जी ने विचार व्यक्त किए।