


महाड़ । परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य प.पू.प्रवचन दक्ष युवाओं के राहभर मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. ने तप अनुमोदना धर्मसभा में अपने क्रांतिकारी विचार रखे। मुनिश्री ने कहां भगवान महावीर का त्याग महा तप हो सकता है एसा शास्त्र कहते हैं तो माता पिता का बच्चों के लिए त्याग भी किसी तप से कम नहीं है। मुनिश्री ने कहा प्रभु वीर ने त्रिशला मां के गर्भ में हिलना ढुलना बंद किया था,आजके यंग स्टार्स से कहना चाहता हु तुम अपने माता-पिता के सामने बोलना अपमान करना बंद कर देना। मंत्राराधक मुनिश्री ने ये बात 11 उपवास के दंपती तपस्वी विक्रम कुमार व दक्षाबेन कोठारी के तप पारणोत्सव पर कहीं। अपनी नविन रचना द्वारा तप वंदनावली की 5 स्तुति के माध्यम से मुनि श्री ने तप की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला। सुंदर राग के साथ सुमधुर आवाज में स्तुतियों ने माहोल को तपमय बना दिया। स्मरण हो मुनि श्री ने पिछले महीने सुंदर स्तवनों (गीतों ) की रचना की है उनकी पुस्तक का विमोचन भी जल्दी ही होने वाला है। इसके पहले सर्वप्रथम वासुपूज्य जिनालय मे दर्शन वंदन कर भक्तांमर एवं गुरु चालीसा का मंगलपाठ किया गया । तपस्वी ने प्रभु समक्ष गहूंली की एवं गौतम स्वामीजी की आरती का लाभ लिया तथा श्री फल की प्रभावना की गई। चल समारोह विनेश्वर मंदिर कार्यक्रम स्थल पहुंचा जहां सर्वप्रथम गायक प्रशम वासा मुंबई ने संगीतमय गुरु वंदना कराई ।मुनिश्री ने मंगलाचरण किया। मुनिश्री मंगलचंद्र विजयजी ने उद्बोधन दिया। तप अनुमोदना का सुन्दर गीत प्रस्तुत किया गया। पाक्षिक बहुमान लाभार्थी सम्पतजी एवं चातुर्मास समिति व महाड श्रीसंघ ने तपस्वी दंम्पति का शाल श्रीफल तिलक व बहुमान पत्र द्वारा स्वागत किया। तपस्वी के रिश्तेदारों ने स्वागत किया। अंत में मांगलिक के ठीक पहले मुनिश्री ने तपस्वी के पारणा को तप से कराने की प्रेरणा की। विक्रम कोठारी को 09 उपवास से पारणा कराने का लाभ सौ.रिद्धि हिमांशुजी भंडारीने एवं दक्षाबेन को 08 उपवास से पारणा कराने का लाभ सौ. ललिता महावीरजी कोठारी ने प्राप्त किया। मुनिश्री ने सेकंडों की संख्या से पधारे महेमानों को अपने नगर के मुलनायक का रोज एक माला गिनने का एवं प्रतिदिन छोटी-मोटी जीवदया करने की प्रेरणा दी जिसे सभी से सहर्ष स्वीकार की। मुनिश्री की प्रेरणा से सामायिक बैंक की स्थापना की गई, उसके रजिस्टर का ओपनिंग का लाभ 711 सामायिक में छोटिया बेन सुरेशजी सांभरा बारडोली ने प्राप्त किया। रजिस्टर में पहला नाम अंकित कराने का चढ़ावा 211 सामायिक में प्रवीणजी गदिया ने लिया, ये तप एवं समायिक अनुष्ठान चारमाह में श्रद्धालु पुरा करेंगे । लादुलालजी व राजमलजी कोठारी ने अपनी बात रखी। अंत में मुनिश्री ने मांगलिक सुनाई। पश्चात् महिला सांझी प्रारंभ हुई। तपस्वी ने पारणा किया। संचालन पवन देशरला ने किया। दिलीप सुखलेचा,अशोक शाह प्रविण कटारिया ने आभार व्यक्त किया। शनिवार को आचार्य श्री ऋषभचंद्र सूरीजी की चौदहवी मासिक पुण्यतिथी निमिते श्रीपार्श्वनाथ वदंनवली व दीपक एकासना का आयोजन छोगमलजी कटारिया परिवार महाड़ द्वारा होगा। 20 दिवसीय यतिधर्म तप सोमवार 25 जुलाई से प्रारंभ होगा।