जब सुख पास होता है तो उसकी कद्र नहीं करते है और जब दूर जाता है तो उसे याद करते हों – पूज्याश्री अरुणाप्रभाजी मसा

कुमारी सलोनी मेहता का 11 उपवास पूर्ण करने पर बहुमान किया एवं श्रीमती ज्योति बाफना ने 9 उपवास के परत्याख्यान ग्रहण किए

रतलाम । थानांग सूत्र के अनुसार गौतम स्वामी प्रभु महावीर से पूछते है की देवता धरती पर किन कारणों से आते है । प्रभु ने दूसरा कारण बताया की मनुष्य भव में उसके उपकारी गुरुदेव, आचार्य, उपाध्याय, साधु भगवन ने उसे जो सदमार्ग दिखाया धर्म का मार्ग दिखाया जिसकी वजह से आज मैं देवलोक में आ पाया, इसलिये उनके दर्शन वन्दन करने देवता धरती पर आते है। जब सुख का अहसास होता है उस समय वक्त बहुत जल्दी गुजर जाता है, जैसे हम कोई अच्छी फिल्म देखने जाते है तो घण्टे कँहा बीत जाते है पता ही नही चलता है, घर में कोई शादी या शुभ कार्य हो तो कब सुबह की शाम हो जाए पता ही नही चलता है, वैसे ही देवलोक में देवता नाटक देखने में मशगूल हो जाए तो धरती के 1000 वर्ष बीत जाते है ।
फिर भी कोई सम्यकत्व देव अपने वचन से बंधे हो तो देवलोक के सुख छोड़कर धरती पर आते है।
यह अढ़ाई द्वीप 45 लाख योजन का है, 45 लाख योजन की सिद्ध शीला है, 45 लाख योजन का श्रीमन्त नरकवास है, वैसे तो असंख्यात नरकवास है, इन्द्रो के देव शकरेंद्र के पास 45 लाख योजन का सर्वसिद्ध विमान है।
इस 45 लाख योजन अढ़ाई द्वीप में जो घोर तपस्वी, बाल तपस्वी, उत्कृष्ट ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले साधू सन्त है उनका वन्दन करने के लिए देवता धरती पर आते है। हो सकता है गंगा किनारे रहने वाला गंगा का महत्व नही समझे और दूर दूर से देश विदेश से श्रद्धालु गंगा के दर्शन करने गंगा में डुबकी लगाने गंगा तट पर जाते है, वैसे ही हमारे आस पास ऐसे कई सन्त सतियाँ है, जिनकी साधना और पुण्य प्रताप को हम समझ नही पाते है।
शतावधानी पूज्याश्री गुरु कीर्ति ने महावीर कथा को आगे बढाते हुए कहा की आदिनाथ भगवान की पुण्यवानी जबरजस्त थी, उसके बाद माता मरुदेवी की पुण्यवानी थी, बिना नवकारसी, बिना सामायिक, बिना दिक्षा के उन्हें केवलज्ञान मोक्ष की प्राप्ति होती है दुख क्या होता है ये मरुदेवी माता को पता ही नही है। 65000 पीढ़ी सुखे सुखे मरुदेवी माता ने देखी। बेटे, पोते, पड़पोते, लड़पोते सभी मरुदेवी को माँ ही कहते थे।
1000 वर्ष बीत गए भगवान आदिनाथ को दिक्षा लिये हुए, लेकिन फिर भी माता मरुदेवी हमेशा बेटे को देखने के लिये आतुर रहती थी, ऋषभ ऋषभ करती रहती थी, भरत को उलाहना देती थी की तु तो राज कर रहा है और मेरा ऋषभ पता नही जंगल में कँहा कँहा भटक रहा होगा। वो रात दिन ऋषभ को याद करके उदास रहती थी।
मरीची हमेशा मरुदेवी को उदास देखता रहता है, मरीचि के शरीर में से रश्मियां निकलती है तेजस्वी था, कोई बात वो ठान लेता तो पूरा करके ही रहता, पूर्व भव के पुण्योदय से उसे आदिनाथ का कुल मिला। लेकिन मरीच का दुर्भाग्य देखिए की आदिनाथ के साथ रहते हुए भी वो अपना आने वाला भव बिगाड़ लेता है । मरीची अपने पिता भरत चक्रवर्ती के पास जाता है की माँ दुखी है, आप सब कार्य छोड़कर माँ को बेटे से मिलाने का कार्य करो, भरत कहता है जैसी माँ है उससे बढ़कर बेटा है, दिक्षा के बाद 13 माह तक सुस्ता आहार नही मिला तो भी नही माने, पड़पोते श्रेयांसकुमार के हाथों इक्षु रस से पारणा हुआ, माँ जिद्दी है तो बेटा उससे बड़ा जिद्दी है मुझे पता नही अभी आदिनाथ भगवान कँहा है, मरीची कहता है तो आप उन्हें ढूंढिए, भरत कहता है तुम अपना काम करो। उस वक्त भरत चक्रवर्ती बनने के लिये प्रयासरत है।
राज दरबार में एक तगड़ा व्यक्ति आता है और भरत को प्रणाम करता है, बाद में मरीच भरत से कहता वो आपसे बलशाली था फिर भी उसने आपको प्रणाम किया ऐसा क्यों, भरत कहता है उसके पास शक्ति है लेकिन युक्ति नही है इसलिये उसने मुझे प्रणाम किया, मरीची मैं भी युक्तिशाली बनूंगा । कुछ दिन वही व्यक्ति राजसभा में आता है इस बार भरत ने उठकर उसका स्वागत किया, मरीची ने फिर इसका कारण पूछा तो भरत ने कहा अब इसके पास शक्ति भी है युक्ति भी है, दुनिया की कोई ताकत इसे हरा नही सकती है, मरीची प्रण करता है मुझे भी शक्तिशाली बनना है, दुनिया को अपने कदमों में झुकाना है, वो शक्तिशाली बनने में लग जाता है।
उधर आयुधशाला में भरत को चक्रवर्ती बनाने की तैयारी चल रही है, मरीची ने इसका कारण पूछा तो भरत कहता है मुझे चक्रवर्ती बनकर पूरी दुनिया पर राज करना है। मरीची काका बाहुबली के पास जाता है और कहता है मुझे भी पिता की तरह शक्तिशाली बनना है।
भरत के महल में एक विषय गुप्त दरवाजा है, उसने तीन दूत रखे हुए है पहला दूत भगवान आदिनाथ भगवान के समाचार देने के लिये, दूसरा परिवार के समाचार देने के लिये और तीसरा चक्रवर्ती की तैयारी की सूचना देने के लिये उस द्वार से एक वक्त में किसी एक ही कार्य के लिये दूत आते थे, लेकिन उस दिन तीनों दूत एक साथ उस द्वार से भरत के पास आए अब वो दूत क्या क्या समाचार लाते है भरत किस सूचना को प्राथमिकता देता है यह आगे सुनने पर पता चलेगा। संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया ने बताया की आज कुमारी सलोनी मेहता का 11 उपवास पूर्ण करने पर बहुमान किया गया साथ ही श्रीमती ज्योति बाफना ने 9 उपवास के परत्याख्यान ग्रहण किए।
आज के जाप समरथमल, दीपक, अभिषेक बोथरा के निवास पैलेस रोड़ पर एंव दिनाँक 24 जुलाई के जाप कल्याणमल भटेवरा के निवास पोरवाडो के वास पर रखे गए है।

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