महापुरुषों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे निर्मित भारतीय संस्कृति का लोहा पूरा विश्व मान रहा है – राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

विश्व हिंदू परिषद की ओर से राष्ट्र संत कमलमुनि जी को साहित्य भेंट कर अभिनंदन किया गया


मंदसौर जीवा गंज 24 जुलाई 2022 । भौतिकवाद कि पाश्चात्य संस्कृति में गले तक डूब कर आध्यात्मिकता की चर्चा करना धर्म आत्मा और परमात्मा के साथ धोखा है । उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने जैन दिवाकर प्रवचन हाल में शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर जनसभा को संबोधित करते कहा कि शहीदों का लक्ष्य से देश को मात्र आजाद कराना नहीं था बल्कि ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंचाने का था उन्होंने खून बहाया। हम कम से कम पसीना तो बढ़ाएं आज हमारी दैनिक जीवन शैली में महापुरुषों के सिद्धांतों के साथ सौतेला व्यवहार नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे निर्मित भारतीय संस्कृति का लोहा पूरा विश्व मान रहा है विज्ञान की कसौटी पर शत-प्रतिशत खरा उतर रहा है पूरेविश्व के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
मुनि कमलेश ने बताया कि भोग वादकी पाश्चात्य संस्कृति ने लोग अशांति और तनाव दिया है विदेशी लोग इससे ऊब चुके हैं और वहां योग मौन ध्यान साधना को अपना रहे हैं।
जैन संत ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का हमला आतंकवाद से अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है। क्यों हमारे संस्कार संस्कृति और सभ्यता को कुचल रहा है। अंत में कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व को सच्ची सुख और शांति प्रदान कर सकती है भौतिकवाद की चकाचौंध में हम जैसे संतों का निर्माण होना किसी चमत्कार से कम नहीं है यह भारतीय संस्कृति की देन है। विश्व हिंदू परिषद की ओर से राष्ट्र संत कमलमुनि का साहित्य भेंट कर अभिनंदन किया गया । गुरु चरण बग्गा, प्रदीप चौधरी, नवनीत पारक, प्रतिक् व्यास, विनोद जाट, अमरदीप कुमावत, मनीष भाटी, हेमंत बुलचंदानी आदि सभी कार्यकर्ताओं ने मुनि कमलेश से मार्गदर्शन प्राप्त किया। घनश्याम मुनि जी का आज 15वां उपवास है । सेवक भेरु के 11 उपवास है तथा अखंड महामंत्र नवकार का जाप चालू है । समारोह का संचालन महामंत्री विजय खटोड़ ने किया । अभय चोर्डिया प्रकाश रातडिया सुभाष नाहर ने अतिथियों का स्वागत किया। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली महिला शाखा राष्ट्रीय मंत्री शिखा जैन मुनि कमलेश की प्रेरणा से चार वात्सल्यधाम जोधपुर सूरत बेंगलुरु इंदौर संचालित कर रही है। जिसमें करीब 300 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं मूर्तिपूजक महासति जी ने मुनिकमलेश से मार्गदर्शन प्राप्त किया ।

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